उमेश्वर: हम हसदेव के आदिवासी हैं, आक्सीजन बचाने का संघर्ष करते हैं साहब। जल जंगल जमीन बचाना हमारा धर्म है, … READ MORE
उमेश्वर सिंह अर्मो: यह कविता लेखक ने रक्षाबंधन के समय लिखी थी आहत न होना बहन,मैं दिल की खोल रहा… READ MORE
उमेश्वर: विकास बेटा की चाहत में, मैंने नदी नाला पहाड़ खोद डालाबेटा विकास कहां छिपा है तू?बड़े-बड़े पावर प्लांट चिमनी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
Designed with WordPress