आज भी हमें डर है – कविता

जेरोम जेराल्ड कुजूर: आज भी हमें डर है।हमारी ज़मीन पर,हम खुशहाल थे,धान, मडुवा, गोंदली, मकई सेलहराते थे हमारे खेत,देख हम सभी,संग झूमते- नाचते थे अखरा

Continue reading