भरत भट्ट: दूर कहीं एक दीपक जल रहा था,मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल पल रहा था,तुम्हें सोचते सोचते रात इतनी… READ MORE
भरत भट्ट: वो गुज़र रही है धीरे से मेरी लाश के ऊपर सेचार क़दम चढ़े है मेरे, कफ़न के ऊपर… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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