मनीष आज़ाद:
‘मैरी वुल्सटनक्राफ्ट’ जिसने ‘रूसो’ को चुनौती दी…
1791 में टामस पेन ने महत्वपूर्ण दस्तावेज ‘Rights of Man’ लिखा। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसके महज एक साल बाद एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज आया-‘Vindication of the Rights of Woman’ जिसे मैरी वुल्सटनक्राफ्ट लिखा था।
दरअसल इतिहास में जब-जब महान पुरुषों ने स्त्री के बारे में कुछ गलत कहा है (या चुप रहे) तो उसका प्रतिकार महिलाओं ने तुरंत किया है। यह और बात है कि बाद में ऐसी महिलाओं को इतिहास के अंधेरे कमरे में धकेल दिया गया। ‘मैरी वुल्सटनक्राफ्ट’ एक ऐसी ही विदुषी थी। याद कीजिये जब महान डार्विन ने यह कहा था कि महिलाओं के पास पुरुषों से कम दिमाग होता है तो ‘एलिजा बट गम्बल’ (Eliza Burt Gamble 1841–1920) ने इसका प्रतिकार करते हुए 1894 में एक किताब लिखी- ‘The Evolution of Woman: An Inquiry into the Dogma of Her Inferiority to Man’ और सबूतों, वैज्ञानिक तर्कों के माध्यम से साबित किया कि डार्विन गलत हैं। यानी महिलाएं किसी भी तरह से पुरुषों से कमतर नहीं हैं।
ठीक इसी तरह जब महान दार्शनिक रूसो ने शिक्षा के बारे में अपने विचार रखते हुए दो तरह की शिक्षा की वकालत करते हुए यह लिखा कि महिलाओं को इस तरह की शिक्षा दी जानी चाहिए कि वे बच्चों का पालन-पोषण अच्छी तरह से कर सकें। तब ‘मैरी वुनस्टनक्राफ्ट’ ने समान शिक्षा की वकालत करते हुए रूसो का विरोध किया। ‘मैरी वुल्सटनक्राफ्ट’ ने लिखा कि जो विषय पुरूष पढ़ सकते हैं, वो महिलाएं भी पढ़ सकती हैं। महिला-पुरूष के बीच कुछ शारीरिक बनावट के अंतर के अलावा और कोई फर्क नहीं है।
आज भी इस बात को समाज में बहुत कम लोग स्वीकार कर पाते हैं। तो यह समझा जा सकता है कि आज से करीब 250 साल पहले यह बात कितनी क्रांतिकारी बात रही होगी।
एडमंड बर्क ने जब फ्रांसीसी क्रांति (1789) पर अपने लेखों के माध्यम से हमला बोला तो मैरी वुल्सटनक्राफ्ट बहादुरी के साथ फ्रांसीसी क्रांति के साथ खड़ी हुई और अपने तमाम लेखों के माध्यम से एडमंड बर्क की धज्जियां उड़ा दी।
इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति का अंध समर्थन करने की बजाय उसकी कमज़ोरियों पर भी उंगली उठाई और चेताया कि फ्रांसीसी क्रांति का ज़्यादा लाभ पुरुषों को मिल रहा है और महिलाएं इसके लाभ से वंचित हो रही हैं।
हमे इतिहास के अंधेरे कोनों में धकेल दी गयी ऐसी महान स्त्रियों को फिर से इतिहास की रोशनी में लाना होगा, तभी हम एक सभ्य समाज गढ़ने की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

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