विकास कुमार

श्रुति, दिल्ली द्वारा तीन दिवसीय युवा महोत्सव का आयोजन 26–28 मार्च 2026 को प्रगति ट्रेनिंग सेंटर, नागपुर (महाराष्ट्र) में किया गया। इस आयोजन में 18 राज्यों के 250 से अधिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने पूरे जोश के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई।

युवा महोत्सव एक खास अवसर होता है, जिसमें चार भाषा-क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक परिवर्तन शाला (स्कूल फॉर सोशल चेंज) के प्रतिभागियों का राष्ट्रीय स्तर पर समागम होता है। राष्ट्रीय स्तर के इस समागम की विशेषता यह रही कि पिछले एक वर्ष में आयोजित राज्य स्तरीय शिविरों से निकले उड़ीसा, तमिलनाडु, झारखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रतिभागियों ने इसमें भागीदारी की।

इससे पहले युवा महोत्सव का आयोजन 2018 में मानगाँव (रायगढ़, महाराष्ट्र) और 2019 में नासिक (महाराष्ट्र) में किया गया था। कोरोना महामारी के कारण दो वर्षों तक एस.एस.सी. की प्रक्रिया बाधित रही। इसके बाद 2023 में सेवाग्राम (महाराष्ट्र) और 2024 में अहमदाबाद (गुजरात) में युवा महोत्सव आयोजित हुआ।

लोकतंत्र में यह बेहद जरूरी है कि युवा बिना किसी भय के अपनी बात मुखरता से रख सकें। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष महोत्सव की थीम “कुछ तो बोलो, Your Voice Matters” रखी गई।

कार्यक्रम के पहले दिन एक रैली का आयोजन किया गया। देशभर के विभिन्न संगठनों के साथी अपने बैनर के साथ नारे लगाते हुए और अपने समुदाय/क्षेत्र के पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य-गान के साथ आयोजन स्थल तक पहुंचे। महाराष्ट्र के साथियों ने स्वागत में पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों की मिट्टी, पानी और पौधे भी साथ लेकर आए थे। कार्यक्रम परिसर में वृक्षारोपण के साथ युवा महोत्सव का औपचारिक आगाज हुआ।

प्रथम सत्र में विभिन्न भाषा क्षेत्रों और राज्यों के वे प्रतिभागी, जिन्होंने एसएससी पूरा किया था, उन्होंने एसएससी के व्यक्तिगत और सामाजिक प्रभावों पर अपने अनुभव साझा किए। अधिकांश युवाओं ने बताया कि एसएससी के माध्यम से उनके भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हुआ है, जिसके कारण वे सामाजिक क्षेत्र में पहले से अधिक प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों में एसएससी चला रहे फैसिलिटेटर और मेंटर साथियों ने सामाजिक परिवर्तन शाला (स्कूल फॉर सोशल चेंज) के उद्देश्यों की जानकारी दी और इसकी सफलताओं पर प्रकाश डाला।

इसके बाद कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें एसएससी प्रतिभागियों ने एसएससी से प्राप्त ज्ञान को नाटक, गीत, कविता आदि के माध्यम से प्रस्तुत किया। बिग बैंग, यूनिवर्स की उत्पत्ति, कर व्यवस्था, महिला हिंसा जैसे विषयों पर विभिन्न राज्यों की टीमों ने शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों से यह स्पष्ट हुआ कि एसएससी ने प्रतिभागियों में विषयों की गहरी समझ के साथ-साथ रचनात्मक कौशल भी विकसित किया है।

महोत्सव के पहले दिन समसामयिक मुद्दों पर समूह चर्चा भी आयोजित की गई। सभी प्रतिभागियों को छह अलग-अलग समूहों में बाँटा गया, और प्रत्येक समूह में दो वरिष्ठ साथी मॉडरेटर की भूमिका में थे। समसामयिक विषयों पर गंभीर और सार्थक संवाद हुआ। ये सभी मुद्दे लोगों के जीवन से सीधे जुड़े हुए हैं, इसलिए युवाओं ने खुलकर और मुखरता से अपने विचार प्रस्तुत किए। दूसरे दिन के पहले सत्र में सभी समूहों ने मंच पर आकर समूह चर्चा के दौरान सामने आए मुख्य बिंदुओं को साझा किया। इन चर्चाओं से यह बात सामने आई कि संविधान ने नागरिकों को कई मौलिक अधिकार दिए हैं, लेकिन  नागरिक अधिकारों को कमजोर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों के भीतर जागरूकता और चेतना ही लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

युवा महोत्सव में एक फोटो प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न संगठनों की यात्राओं, सामाजिक मुद्दों और वैज्ञानिक चेतना से जुड़े पोस्टरों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक चीज़ों जैसे मसाले, फलों के देसी बीज, साड़ियाँ, गमछे और अन्य परिधान के स्टॉल भी लगाए गए थे। पुस्तक प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।

महोत्सव के तीनों दिनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष धूम रही। इन कार्यक्रमों में देशभर की विविध भाषाओं और संस्कृतियों की झलक देखने को मिली। प्रतिभागियों ने सामूहिक नृत्य, गीत, कविता, किस्सागोई और नाटक के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। ये प्रस्तुतियाँ मनोरंजक होने के साथ-साथ अपने-अपने क्षेत्रों के सामाजिक मुद्दों और समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करती रहीं।

महोत्सव के अंतिम दिन प्रसिद्ध भाषाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता गणेश देवी ने Census 2027 विषय पर सत्र लिया। उन्होंने मानव समाज के शुरुआती विकास से लेकर लोकतंत्र के निर्माण तक की रोचक यात्रा को प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने जनगणना 2027 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और उसकी प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने कहा कि जनगणना अधिक समावेशी और सटीक होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने नागरिक समाज से आह्वान किया कि क्षेत्रीय स्तर पर जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सक्रिय प्रयास किए जाएँ।

महोत्सव के समापन सत्र के अवसर पर विभिन्न भाषा क्षेत्रों के सामाजिक परिवर्तन शाला 2024-25 बैच के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। साथ ही कार्यशाला सत्रों के फेसिलेटर को सम्मान स्वरूप  प्रतिलिपि भेंट की गई।

नोट: यह लेख लेखक की फेसबुक प्रोफाइल से पुनः प्रकाशित किया गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर जाएँ – https://www.facebook.com/share/p/1GjRgrxmy7

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  • विकास युवा विचारक, स्वतंत्र पत्रकार एवं प्रगतिशील सिनेमा आंदोलन से जुड़े हैं, झारखंड के निवासी,हैं और फिलहाल विशाखापटनम में रहते है।

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