अंजू मल्होत्रा:

नारी…
जो दर्द सहकर भी मुस्कुराना जानती है,
जो अपने सपनों को पीछे रखकर अपनों के सपने पूरा करती है।।
कभी माँ बनकर ममता लुटाती है,
कभी बेटी बनकर घर में खुशियाँ भर देती है।।
कभी बहन बनकर हौसला देती है,
तो कभी जीवनसंगिनी बनकर हर मुश्किल में साथ निभाती है।।
आज की नारी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है।।
वो घर भी संभालती है और बाहर नौकरी भी करती है।।
सुबह से रात तक अनगिनत जिम्मेदारियाँ निभाती है,
थक जाती है… पर अक्सर उफ्फ तक नहीं करती,
बस अपनों की खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढ लेती है।।
नारी सिर्फ एक रिश्ता नहीं,
वो पूरे परिवार की ताकत है,
संस्कारों की नींव है,
और दुनिया की सबसे खूबसूरत भावना है।।
हर उस नारी को नमन,
जो हर दिन चुपचाप अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए,
दुनिया को और बेहतर बना रही है।।

Author

  • अंजू मल्होत्रा, दिल्ली की रहने वाली हैं और प्राइवेट फर्म में अकाउंट और एडमिन डिपार्टमेंट में पिछले 34 सालो से नौकरी कर रही हैं। लिखने का शौक उनको हमेशा से रहा है लेकिन समय की व्यस्तता के कारण वो पहले लिख न सकीं। अब ज़िंदगी में कुछ ऐसा दर्द मिला कि जिंदगी के अकेलेपन मे उपजे भावों को अपनी लेखनी से लिखने की छोटी से कोशिश कर रही हैं और ये अभी शुरुवात ही है।

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