जंग हिन्दुस्तानी:
जंगल में एक दिन हलचल मच गई। गिलहरी, खरगोश, नेवला, तोता, चिड़िया और कई छोटे-छोटे जानवर एक जगह इकट्ठा हुए।
गिलहरी ने कहा – “देखो भाई, यह कब तक चलेगा? हर साल बाघ ही जंगल का राजा चुना जाता है! यह कैसा चुनाव है जिसमें हम वोट भी नहीं देते?”
खरगोश बोला – “बात तो सही है। हमेशा शेर या बाघ जैसे बड़े और ताक़तवर जानवर ही राजा बनते हैं। क्या छोटे जानवर कभी राजा नहीं बन सकते?”
तोते ने भी सहमति जताई – “हम लोगों की बात कोई सुनता ही नहीं है। बाघ के दरबार में हमारे लिए जगह भी नहीं है। और वह कहता है कि वह जंगल की रक्षा करता है, लेकिन असल में तो हमसे दूर ही रहता है।”
बंदर, भालू, हाथी, बाघ – सबके पास एक “जंगल पार्टी” थी।
वे आपस में बैठक करते, नियम बनाते, और तय कर लेते कि “राजा” कौन होगा।
हर बार बाघ ही चुना जाता क्योंकि बड़े जानवर कहते –
“राजा ताक़तवर होना चाहिए, जिससे दुश्मन डरें!”
लेकिन छोटे जानवरों की अपनी परेशानियाँ थीं –
उनके घरों के पास पेड़ काटे जा रहे थे, नदी का पानी गंदा हो रहा था, और उड़ने वाले पक्षियों के घोंसले टूट रहे थे।
राजा बाघ को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था।
एक दिन गिलहरी ने कहा –
“अगर हम सब मिलकर एक संगठन बना लें, तो हमारा भी वोट गिना जाएगा। जंगल में चुनाव होना चाहिए, बस बड़े जानवर तय न करें, हम सब मिलकर चुनें।”
नेवले ने आगे कहा –
“हम छोटे हैं, लेकिन मिलकर बड़े जानवरों से भी ज़्यादा हो सकते हैं! संख्या में ताक़त होती है।”
इस बार सभी छोटे जीव एकजुट हुए। उन्होंने पत्तों से बैनर बनाए, गीत गाए –
“हर जीव बराबर है, राजा सबका प्यारा है!”
उन्होंने अपनी उम्मीदवार गिलहरी को राजा के लिए नामित किया।
पहली बार जंगल में सबको वोट डालने का हक़ मिला –
चींटी से लेकर हाथी तक, सबने पत्तों पर निशान लगाया।
जब वोट गिने गए, तो नतीजा चौंकाने वाला था –
बाघ हार गया, और गिलहरी जंगल की पहली “छोटी राजा” बनी।
गिलहरी ने राजा बनते ही कहा –
“अब जंगल में ताक़त नहीं, समझदारी और सबकी भलाई के आधार पर फैसले होंगे।”
उसके बाद जंगल में नया कानून बना –
हर जीव, चाहे बड़ा हो या छोटा, जंगल के भविष्य के लिए बराबर का हक़दार है।
मतलब आजादी सबके लिए।
(कहानी काल्पनिक है)

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