लाल प्रकाश राही :

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सांझा विरासतों के शहर जौनपुर में दिशा फाउंडेशन, कबीर पीस सेंटर एवं अवध यूथ कलेक्टिव ने संयुक्त रूप से स्वतंत्रता आंदोलन की साँझी विरासत और देश निर्माण में हमारी भूमिका पर परिचर्चा का आयोजन किया। साथ ही किशोरियों और समुदाय की महिलाओं के साथ विरासत भ्रमण के दौरान विविध कार्यक्रम किए गए। किशोरियों ने परिचर्चा में अपनी बात बहुत अच्छी तरह से रखी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय की शोध छात्र निकिता ने वैज्ञानिक समाज निर्माण और हम कैसे अपनी भूमिका निभा सकते हैं, इस पर विस्तार से चर्चा किया। इस दौरान शाही किला सहित जौनपुर के विरासतों का भ्रमण कराते हुए शोध छात्रों एवं किशोरियों को इन ऐतिहासिक विरासतों के भ्रमण और इनकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इससे रुबरु कराया गया। इस दौरान लाल प्रकाश राही ने जौनपुर शहर के विरासतों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि, “जौनपुर शहर आपसी सौहार्द, अमन-चैन का पैग़ाम देने वाला शहर है, जो गोमती नदी के दोनों तटों पर विराजमान होने के साथ, अपने सौहार्द और गंगा ज़मुनी तहज़ीब के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के इत्र, मक्का-मुली के चर्चे दूर तलक होते आए हैं।”

उन्होंने कहा “जौनपुर को समझना है तो हमें यहाँ के विरासतों को जानना ज़रूरी है। विभिन्न गाँवों से चलकर आई हुई किशोरियों एवं शोध छात्राओं को उन्होंने ख़ासतौर पर जिले की सांझा विरासतों से जुड़ने, उन्हें समझने की बात कहते हुए स्वतंत्रता आंदोलन की उपयोगिता पर ज़ोर देते हुए आज के परिवेश में स्वतंत्रता आंदोलन की साँझी विरासत और देश निर्माण में हमारी भूमिका पर बहस क्यों ज़रुरी है इसपर खुलकर परिचर्चा की।”

गौरतलब हो कि इस परिचर्चा का मूल मकसद था आज़ादी के सही मायने को किशोरियों युवाओं तक पहुँचाना, विशेषकर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और आज़ादी में शहीदों के आज़ाद भारत के सपनों से रूबरू कराना। परिचर्चा के दौरान संविधान में जिन उद्देश्यों को लेकर देश निर्माण करने का सपना संजोए हुए है उस सपने को साकार करने की ज़िम्मेदारी युवा कैसे निभाएं, यह समझ युवाओं में बन सके, इस पर्याक्रम का मुख्य मकसद था। साथ ही अपनी विरासत के भ्रमण से आज की पीढ़ी को यह समझाने का प्रयास किया गया कि धरोहरें सिर्फ इतिहास नहीं होती हैं, बल्कि हमारे जीवन का हिस्सा भी होती है, वह हमें यह बताती हैं कि समाज और कलाओं का विकास कैसे हुआ है, कैसे लोग विकास की सीढ़ियाँ चढ़ें हैं। इसी अभियान के अंतर्गत दिशा फाउंडेशन ने पारापट्टी और प्रेमापुर ग्राम सभा में संचालित दिशा लर्निंग सेंटर पर बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस पर जश्न-ए-आज़ादी कार्यक्रम के अंतर्गत बाल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बच्चों ने देश भक्ति गानों पर नृत्य प्रस्तुत कर ग्राम वासियों का मनमोह लिया। सेंटरों पर भी स्वतंत्रता आंदोलन की साँझी  विरासत और देश निर्माण में हमारी भूमिका विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। सेंटर संचालिका रजिया और करिश्मा ने बच्चों की बेहतरीन तैयारी करवाई थी। समुदाय के लोगों ने भी खूब सराहना किया।

परिचर्चा कार्यक्रम के क्रम में जौनपुर के प्राचीन शाही पुल, शाही किला जैसी धरोहरें किशोरियों के आकर्षण के साथ-साथ उनकी जिज्ञासाओं के केन्द्र बिन्दु में रहें। जाति-धर्म से परे हटकर मानव धर्म को सर्वोपरि मानते हुए देश की साँझा विरासतों के साथ देश की आज़ादी के लिए अपनी जान तक को कुर्बान करने वाले शहादत वीरों को याद करते हुए उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने की शपथ ली गई।

दिशा फाउंडेशन के सहयोगी आसरा द होप ट्रस्ट के निदेशक सेराज अहमद, दिशा फाउंडेशन टीम के साथी सेराज भाई, साधना यादव, बिंदु यादव, सीमा, करिश्मा, रजिया अजय समेत समुदाय से आई महिलाओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष भूमिका और सहयोग प्रदान किया।

Author

  • लालप्रकाश राही, उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह दिशा संगठन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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