गुफरान :

अयोध्या, प्रयागराज अउर बनारस म जनवरी-फरवरी के महीना मेला अउर आस्था के भव्य आयोजन से गुलजार रहेला। लाखों श्रद्धालुन के जुटान, भारी भीड़ अउर प्रशासनिक दबाव के कारण स्कूल बंद कर देल जात ह। लेकिन ई बंदी हजारों बच्चन के पढ़ाई अउर भविष्य के संकट में डाल देला। खासकर जे बच्चे बोर्ड परीक्षा के तैयारी करत हीं, उनका पर ई बंदी के गहिरा असर पड़ रहल बा।

शिक्षा बनाम आस्था: कुंभ मेला जरूर संस्कृति के हिस्सा बा, लेकिन शिक्षा ही समाज के बुनियादी आधार ह। उत्तर प्रदेश के शिक्षा व्यवस्था पहिले से कमजोर रहल। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) 2022-23 के रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश म 2018 से 2023 तक 15,000 से अधिक सरकारी प्राइमरी अउर अपर प्राइमरी स्कूल बंद हो गइल। ई स्कूल बंदी के कारण ग्रामीण इलाका अउर गरीब वर्ग के बच्चा सबसे अधिक प्रभावित भइल बा। शिक्षा पर खर्च घटावल जात बा, जबकि धार्मिक आयोजनन खातिर करोड़ों रुपया आवंटित कइल जा रहल बा।

आंकड़ों के आईना:

  • 2025 के कुंभ मेला खातिर 5000 करोड़ रुपया के बजट पास कइल गइल।
  • राष्ट्रीय शिक्षा बजट में 2020 से 2024 तक 10% तक कटौती भइल।
  • उत्तर प्रदेश म लगभग 1 लाख से अधिक शिक्षक के पद खाली पडल बा।
  • 2022 के सर्वे अनुसार, 60% सरकारी स्कूलन म डिजिटल शिक्षा के बुनियादी सुविधा मौजूद नाहीं बा।

गरीब अउर ग्रामीण इलाका के बच्चन पर असर: अर्जुन, जे 12वीं म पढ़त बा अउर इंजीनियर बने के सपना देखत ह, स्कूल बंद होय से परेशान बा। उ कहत ह, “अब अकेले पढ़ाई करत हईं। बहुत कठिन लागत बा। परीक्षा खराब गइल त सपना टूट जाई।” रामलाल, जे मजूरी करत ह, बतावत ह, “हमार बेटी डॉक्टर बने चाहत रहि। लेकिन स्कूल बंद होय से ओकर पढ़ाई छूट गइल। ट्यूशन के खर्चा हम नइखे उठा सकत।”

सामाजिक न्याय अउर शिक्षा: सरकारी स्कूलन के हालत बदतर हो रहल बा। अमीर परिवारन के बच्चन खातिर निजी स्कूल अउर ऑनलाइन शिक्षा के सुविधा बा, जबकि गरीब अउर ग्रामीण इलाका के बच्चन के पास कवनो वैकल्पिक व्यवस्था नाहीं बा। शिक्षा में भेदभाव बढ़ रहल बा, जे समाज में असमानता अउर पिछड़ापन के जड़ मजबूत कर रहल बा।

मीडिया अउर प्रशासन के अनदेखी: जवन मीडिया कुंभ मेला के भव्यता के महिमामंडन कर रहल बा, ओही मीडिया बच्चन के शिक्षा पर हो रहल संकट प चुप बा। द वायर (2025) अउर द हिंदू के रिपोर्ट बतावत बा कि बोर्ड परीक्षा से पहले स्कूल बंद होय से 60% छात्रन के प्रदर्शन कमजोर हो गइल।

समाधान अउर भविष्य के राह:

सरकार के चाहीं कि शिक्षा के प्राथमिकता देवे। वैकल्पिक कक्षा, डिजिटल शिक्षा के विस्तार अउर शिक्षक के बहाली के पक्का इंतजाम कइल जाव। सामाजिक न्याय अउर वैज्ञानिक चेतना के विकास तबही संभव बा, जब हर वर्ग के बच्चा के बराबर शिक्षा के अवसर मिले। आस्था जरूरी बा, लेकिन शिक्षा के कुर्बानी देके समाज आगे नाहीं बढ़ सकत। शिक्षा ही समाज के सच्चा भविष्य है।

फीचर्ड फोटो आभार – द टेलीग्राफ

Author

  • गुफरान, फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर युवाओं के साथ उनके हक़-अधिकारों, आकांक्षाओ, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं।

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