इच्छा और जानवी :

इच्छा और जानवी दोनों ने अपने मोहल्ले को लेकर एक किस्सा गोई तैयार किया है –

इच्छा : दिलकुश मोहल्ला बहुत अच्छा मोहल्ला है, हमने सुना है, यह अवध के नवाब की रानी और बड़े अधिकारियों की बीवियों का बसेरा हुआ करता था।

जानवी : हाँ हाँ रहती रही होंगी अवध के नवाबों की रानियाँ। पर अभी तो दिलकुशा मोहल्ला बहुत ही बुरा मोहल्ला हो गया है।

इच्छा : तुम ऐसे कैसे बोल रही हो, की हमारा मोहल्ला अच्छा नहीं है।

जानवी: मोहल्ले में अगर किसी से लड़ाई होती है तो मोहल्ले के लोग लड़ाई सुलझाने के अलावा लड़ाई का मजा लेते हैं। 

इच्छा : हाँ, हम बच्चों के लिए मोहल्ला अच्छा नहीं है, यहाँ के लोग हम लोगों को खेलने नहीं देते हैं, अपनी जगह से बड़े हमको हाकते हैं।

जानवी: यहाँ किसी से किसी की लडा़ई हो जाए तो लड़ाई होने के बाद जिसके घर से लड़ाई होती है उसकी घर की बुराई करते और मज़ा लेते हैं।

इच्छा: जब हम हम लोग अपने मोहल्ले की सकरी गलियों में खेलते हैं, तो ज्यादतर बड़े हमको वहाँ से डांट कर भगा देते हैं।

जानवी: इसकी बुराई उससे करते हैं, उनकी बुराई दूसरों से करते हैं। जो बड़े एक-दूसरे से बुराई बतियाते हैं, जब कोई और मिलता है, तो फिर पहले वाले की बुराई करते हैं, मुझे समझ में नहीं आता ऐसा कैसे कर लेते हैं।

इच्छा : मेरी बड़ी दीदी बताती हैं, जब वह बच्ची थी, तब बहुत खेलने की जगह होती थी, जो कि अब नहीं है। सभी जगहों पर घर बन गया है।

जानवी: जैसे की दिलकुशा मोहल्ला नाम है, दिल को खुश या प्रशान्य करने वाला, पर अब बस नाम ही है, वैसा मोहल्ला अब रहा नहीं है।

इच्छा: लोगों की बातों से पता चलता है, पहले के लोग एक-दूसरे का साथ देते थे, दुःख-तकलीफ में साथ खड़े होते थे। पर अब ऐसा नज़र नहीं आता है।

जानवी: यह मोहल्ला बिल्कुल भी दिल खुश नहीं रहा है। सब एक-दूसरे के जलन में रहते है। 

इच्छा: लेकिन अब बहुत कम लोग हैं जो एक-दूसरे का साथ देते हैं। 

जानवी: मोहल्ले में अगर कोई लड़की किसी लड़के से बात कर ले, तो ज़रूर इनका चक्कर चल रहा है। इस चक्कर में सब घनचक्कर हो रहा है।

इच्छा: हम बच्चों की एक छोटी टोली जिसका नाम woman है, हम सब मिलकर घूमने जाते हैं। मज़ा-मस्ती करते हैं। 

जानवी: मज़े में रहना, मज़े में जीना, मोहल्ले के बड़े लोगों को आता नहीं है। जो वह सोचते हैं मेरे हिसाब से उनकी सोच अच्छी नहीं है।

इच्छा: हमारे मोहल्ले में बिजली चली जाती है, तो पानी की परेशानी होती है। पानी नहीं तो जिंदगी रुक जाती है। 

जानवी : जब मम्मी, आंटी और दादी लोग एक साथ जमा होते हैं तो पुराने गड़े मुद्दे को खोदती हैं। 

इच्छा: जागृति की दीदी के घर पर एक हरा रंग का हैंडपंप है। वहीं से सभी लोग पानी अपने इस्तेमाल के लिए लेते हैं। बाकी अब हैंडपंप किसी के घर में नहीं हैं। 

जानवी: हमारे मोहल्ले में खेलने का मैदान भी नहीं है। लड़की होने की वजह से मोहल्ले के बाहर भी नहीं जा सकते।

इच्छा: हैंडपंप पर पानी के लिए पूरा मोहल्ला इकट्ठा होता है जिसके लिए लाइन लगानी पड़ती है। 

जानवी: जब हम अपने घर के पीछे खेलते हैं तो वहाँ पर एक गाड़ी खड़ी होती है और वह चिल्लाती है कि यह टूट जाएगा, वह टूट जाएगा खेलने नहीं देती। 

इच्छा: एक बार की बात है, हम लोग ठण्ड में क्रिकेट खेल रहे थे तभी एक औरत ने आकर हम लोगों पर पानी डाल दिया। 

जानवी: अगर हम ज़बरदस्ती खेलते हैं, तो वह हमारे घर पर जाकर शिकायत करती है या लड़ने लगती हैं।

इच्छा: और उस औरत ने हमारी बॉल को भी आग में जला दिया था, बच्चों से इस कदर नफ़रत कि छोटी-छोटी बात पर हाय तौबा मचा देती हैं। 

जानवी: मोहल्ले के लोग आपस में एक-दूसरे की बुराई और मजाक उड़ाते हैं।

इच्छा: मोहल्ले के लड़के गुंडा-गर्दी, गाली-गलौज़, तंबाकू-गुटखा, इन सब चीजों में आगे हैं। लड़के जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वह नशे की तरफ तेज़ी से जाते हैं। इनको शर्म नहीं आती की मोहल्ले में ही नशा करते हैं। 

जानवी : यहाँ के लोग एक-दूसरे पर अधिक ध्यान देते हैं। कौन, कहाँ जा रहे है; कौन क्या कर रहा है; कौन किस से बातें करता है। कृपया करके अपने-अपने घरों में ध्यान दें, ना कि दूसरों के घर में कान दें। 

इच्छा : इस चक्कर में लड़कियाँ परेशान होती हैं, उनके ऊपर चौकसी होने लगती है। इससे लड़कियाँ सर्वेलेंस को महसूस करती हैं। इस सर्वेलेंस जैसी स्थिति होने से जो स्वतंत्र माहौल में लड़कियाँ अपनी पढ़ाई-लिखाई और दोस्ती यारी करती हैं, उसमें बहुत समस्या होती है। 

जनावी : तो जो मैंने पहले ही कहा कि दूसरों के घरों में कान लगाने से बेहतर है, अपने घरों पर ध्यान दें और अपने प्यारे से मोहल्ले दिलकुशा को दिल खुश की तरह से बनाए। 

इच्छा : दिलकुशा को हम लड़कियाँ ही मिलकर दिल खुशा बनाएंगे। इसमें अपनी बड़ी बहनों, अम्मा और अंटियों को अपने साथ जोड़ेंगे।

जानवी : सबके लिए साथ बैठने और मिलकर बात करने की जगह बनाएंगे। जहाँ बिना झिझक सब अपनी बात कहें और दूसरों को सुने। 

इच्छा : तो आइये आज हम सब, हम और आप एक दूसरे से यह वादा करें कि अपने-अपने गाँव मोहल्ले को दिलकुशा, दिल खुश बनाएंगे…..!

Authors

  • इच्छा भारती दिलकुशा धारा रोड़ फ़ैज़ाबाद की रहने वाली हैं और वे प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र से जुड़ी हैं । इच्छा पेंटिंग बनाने का शौक रखती हैं और साथ ही सुकन्या देवी शिवप्रसाद इंटर कॉलेज में कक्षा दसवीं में पढ़ाई कर रही हैं।

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  • जानवी वर्मा दिलकुशा धारारोड फैजाबाद की रहने वाली हैं और प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र से जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में वे सुकन्या देवी शिवप्रसाद इंटर कॉलेज में कक्षा दसवीं मैं पढ़ाई कर रही हैं।

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