आदियोग:

विशेष आकर्षण:
चलेगी छुकछुक रेल, बंदर होंगे ड्राइवर और गार्ड
बच्चों और बूढ़ों के लिए नहीं लगेगा कोई टिकट

वह दिन दूर नहीं जब लखनऊ में होगा दुनिया का अनोखा और शानदार चिड़ियाघर। इन दिनों इसका ख़ाका तैयार किये जाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। यह जानकारी आज यहाँ विश्वविख्यात पर्यावरणविद और प्रस्तावित चिड़ियाघर के मुख्य परियोजनाकार ने फोन पर हुई ख़ास बातचीत में दी। 

उन्होंने दावा किया कि चिड़ियाघर में इतनी तरह के जीव जंतु मौजूद होंगे कि किसी को उन्हें देखने के लिए कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं होगी। एनिमल प्लेनेट जैसे चैनल इस चिड़ियाघर के सामने फीके पड़ जायेंगे, कहें कि पानी भरने लगेंगे। यह भी हो सकता है कि ऐसे तमाम चैनल अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर यहीं आकर आसन जमा लें। 

उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर में दुनिया भर के जीव जंतु, पंछी और जानवर होंगे। उनके लिए सांप घर, मछली घर, तितली घर, मगरमच्छ घर वगैरह होगा। बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, सियार, लोमड़ी, भालू, कछुआ, लकड़बग्घा, शुतुरमुर्ग, जिराफ़, कंगारू, गिलहरी, बारासिंघा, गोरिल्ला, चिंपांजी, ऊदबिलाव, उल्लू, गैंडा आदि तमाम जानवर तो होंगे ही। हुक्कू बंदर से लेकर पांडा और पोलर बीयर तक की भी मौजूदगी होगी। 

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कोशिश होगी कि चिड़ियाघर में पेंग्विन, सील और डाल्फिन जैसे समुद्री जीवों को भी जगह मिले। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि शार्क और व्हेल जैसे विशालकाय जीवों को शामिल करने की कतई कोई योजना नहीं है। इसलिए कि इसमें बड़ा ख़तरा हो सकता है। 

उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर में सभी प्राणियों के लिए उनका कुदरती माहौल विकसित किया जायेगा। जैसे कहीं बाकायदा रेगिस्तान बनाया जायेगा, कहीं घना जंगल विकसित किया जायेगा, कहीं बर्फीला पहाड़ खड़ा किया जायेगा तो कहीं समुद्र तैयार किया जायेगा। ताकि हरेक प्राणी घर जैसा महसूस करे, किसी को कोई परेशानी ना हो। हरेक जीव के रहन सहन और ज़रूरतों का समुचित ख़्याल रखा जायेगा। 

चिड़ियाघर में विभिन्न जीवों के लिए अस्पताल होगा। बीमार होने पर पंछियों और छोटे जानवरों को अस्पताल में भर्ती किया जायेगा जबकि बड़े और खतरनाक जानवरों का इलाज़ बेहोशी का इंजेक्शन देकर उन्हीं के बाड़ों में होगा। 

उन्होंने परियोजना का खाका पेश करते हुए यह भी बताया कि चिड़ियाघर में बच्चों का टिकट नहीं लगेगा। उनके साथ आनेवाले दादा-दादा और नाना-नानी को भी टिकट लेने की ज़रूरत नहीं होगी। 

उन्होंने जानकारी दी कि चिड़ियाघर में मनोरंजन के तमाम साधन उपलब्ध होंगे। घोड़े, हाथी और ऊंट की सवारी की पर्याप्त व्यवस्था होगी। बच्चों और उनके साथ आये बूढों के लिए भी यह मनोरंजन मुफ़्त होगा। 

चिड़ियाघर में आरामदायक छुकछुक रेल भी चलेगी। उसके डिब्बे पशु-पक्षियों के सुंदर चित्रों से सजे होंगे। रेल के इंजन का ड्राइवर और गार्ड बंदर होगा। इस काम के लिए बंदरों की टीम को बाकायदा ट्रेनिंग दी जायेगी। इसके लिए भी बच्चों और उनके साथ आये बूढों से कोई टिकट नहीं लिया जायेगा।

चिड़ियाघर में बाहर से खाने पीने का सामान लाने पर पाबंदी होगी। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। चिड़ियाघर में खाने पीने को बहुत कुछ मिलेगा। सब कुछ बहुत सस्ता होगा। और हाँ, अच्छी बात यह कि बच्चे और उनके साथ आये बूढ़े भी अपनी मनपसंद आइसक्रीम खाने का मज़ा मुफ़्त में उठा सकेंगे। 

उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस परियोजना से सबसे ज़्यादा उन बच्चों को ख़ुशी होगी जिनके घरवाले उन्हें चिड़ियाघर ले जाने में आनाकानी करते हैं और इसके लिए बहाने गढ़ते हैं। इसकी मुख्य वजह होती है चिड़ियाघर ले जाने में होनेवाला भारी ख़र्च। 

लेकिन अब चिड़ियाघर में इतनी रियायत मिलेगी कि उन्हें ख़र्च की बहुत चिंता नहीं करनी होगी। उनकी जेब पर मामूली बोझ ही पड़ेगा और वे ख़ुशी ख़ुशी बच्चों का मन रख सकेंगे। अगर दादा-दादी और नाना-नानी भी साथ जायेंगे तो यह पिकनिक लगभग मुफ़्त हो जायेगी, कहीं अधिक मज़ेदार और यादगार हो जायेगी।

उन्होंने यह जानकारी भी दी कि चिड़ियाघर की किसी दूकान पर कोई बच्चा काम पर नहीं लगाया जायेगा। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्वीकार किया कि चिड़ियाघर को चिड़ियाघर कहना सही नहीं। चिड़ियाघर कहने से लगता है जैसे यहाँ केवल चिड़िया ही होंगी, बस चीं चीं चीं का शोर होगा। शेर की दहाड़, घोड़े की हिनहिनाहट या हाथी की चिंघाड़ नहीं सुनायी देगी। ऐसा सोचना गलत होगा। 

चिड़ियाघर को ज़ू कहना ज़्यादा सही है। लेकिन मुश्किल यह है कि छोटे बच्चों को डराने या चुप कराने के लिए अक्सर जूजू का हव्वा खड़ा किया जाता है। ऐसे में छोटे बच्चे ज़ू जाने की बात होते ही सहम सकते हैं। यही सोच कर चिड़ियाघर के लिए हम कोई सुंदर और आसान नाम की तलाश में हैं। सभी से अपील है कि इसमें हमारी मदद करें।

उन्होंने बताया कि जीवों की रक्षा और सम्मान के लिए चिड़ियाघर में दर्शकों के लिए आचार संहिता होगी। इसके तहत किसी जीव को तंग करने या उन्हें खाने पीने की वस्तु देने की सख़्त मनाही होगी। चिड़ियाघर में पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और शराब का सेवन नहीं हो सकेगा। निगरानी के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगाया जायेगा। 

इसी सिलसिले में उन्होंने आगे कहा कि चिड़ियाघर के नियम कायदों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे आरोप में अभियुक्त को फ़ौरन गिरफ़्तार किया जायेगा और उस पर भारी ज़ुर्माना लगाया जायेगा। अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह भी हो सकता है कि उसे हमेशा के लिए चिड़ियाघर आने से ही रोक दिया जाये। 

अभी साक्षात्कार चल ही रहा था कि अचानक ब्रेक लगा, अनहोनी घटी। पीछे से किसी महिला की कड़कती आवाज गूंजी- तंग आ गयी हूं इस लड़के से। दिन भर न जाने क्या बकवास करता रहता है। पता नहीं कौन सी कहानी सुनाता रहता है। कब से चिल्ला रही हूं। होमवर्क पूरा कर ले पहले। फिर जो करना है, कर लेना। सुनता ही नहीं। ठहर जा, अभी सारा भूत उतारती हूं। प्यार से तू समझनेवाला नहीं। कुटम्मस होगी तभी होश ठिकाने लगेंगे। 

परियोजनाकार ने फुसफुसा कर कहा- अभी फोन रखता हूं। आगे फिर बात होगी।

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  • आदियोग / Adiyog

    आदियोग, उत्तर प्रदेश के लखनऊ ज़िले के रहने वाले एक वशिष्ट पत्रकार हैं।

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