जागृति:
मेरा नाम जागृति है। मैं अवध पीपुल्स फोरम में किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके नजरिया निर्माण पर कार्य करती हूँ। हमने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, यौन प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार, लैगिंग समानता और महिला उत्पीडन से जुड़े मुद्दे पर अध्ययन कार्य किया। यह अध्ययन अयोध्या नगर निगम और मिल्कीपुर ब्लॉक के महनोना ग्राम में किया गया। इस अध्ययन को करने का मकसद यह था किशोरियों की इन विषयों पर समझ को जानना और उनके परिवेश को समझने के लिए यह कार्य किया गया।
इस अध्ययन कार्य के दौरान हमारी पहुँच जिन घरों में हुई, उनमें दैनिक मज़दूरी और घरेलु कामगार लोगों की संख्या अधिकतम थी। हमने समुदाय की 11 वर्ष से 18 वर्ष तक की 806 किशोरियों तक अपनी पहुँच बनाई। इन सभी किशोरियों से अध्ययन के दौरान पाया गया कि किशोरियों को शारीरिक स्वास्थ्य, यौन प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, जानकारी और सुविधाओं के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, जबकि इनसे सम्बंधित जानकारी देने के लिए सामुदायिक और ज़िला स्तरीय सामुदायिक केंद्र, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसे कर्यक्रम चल रहे हैं, जोकि समुदाय और विद्यालयों में यह किशोरियों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।
इसी सन्दर्भ में किशोरियों से पूछा गया कि स्वास्थ्य खराब होने पर वह नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाती हैं की नहीं? इसपर 58.9% किशोरियों ने कहा की वह नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाती हैं चूँकि वहाँ उनके साथ उचित व्यहवार नहीं होता, व सुविधाएं नहीं मिलती हैं। इसके चलते एक बड़ी आबादी प्राइवेट हॉस्पिटल, मेडिकल स्टोर से इलाज़ कराती है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्यायों पर किशोरियों की कोई मजबूत समझ नहीं थी। मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करना है, इस विषय पर उनकी कोई समझ नहीं है और न ही वे अपने क्षेत्र के मनोचिक्त्सक को जानती थी। उत्तरदाताओं को किशोरी और महिलाओं के सुरक्षा से जुड़े अभियानों और हेल्पलाइन नंबर की जानकारी भी नहीं थी। बातचीत से ये भी समझ आया कि किशोरियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ पर वे कोई कार्यवाही नहीं कर पाती हैं और इस बारे में किसी से बातचीत भी नहीं कर पाती हैं। किशोरियों से यह प्रश्न किया गया की किसी अनजान व्यक्ति से बात करने के लिए क्या वह सहज महसूस करती हैं? इस प्रश्न पर 31% किशोरियों ने कहा की उनके किसी भी पुरुष से बात करने में असहज महसूस होता है। स्कूल और मार्किट अकेले जाने के लिए 25% किशोरियां सहज महसूस नहीं करती हैं। वह अपने भाई और माँ के साथ जाती हैं। 21.5% किशोरियों को घर से बाहर जाने के लिए पुरुषों से अनुमति लेना पड़ता है।
इस अध्ययन के विश्लेषण करने पर यह ज्ञात हुआ कि किशोरियों को मानसिक और यौनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर समझ नहीं है। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और महिला कल्याण विभाग के द्वारा चलाये जा रहे प्रयासों को और अधिक समुदाय के बीच ले जाने का प्रयास करने की ज़रूरत है। इसके साथ ही युवाओं को समुदाय के लिए संचालित योजनाओं को खुद भी करीब जाकर समझने की ज़रूरत है। कईं सारे सरकारी प्रयास हो रहे हैं, ज़रूरत हैं इन सारे सरकारी प्रयासों को समुदाय के बीच एक्टिव किया जाए। इन प्रयासों में ठहर कर समुदाय के लोगों को शामिल किया जाए। जिससे अधिकांश युवा लोगों को अपनी पढ़ाई-लिखाई के साथ बेहतर स्वास्थ्य व देखभाल की समझ बन पाए और उनको स्वस्थ जीवन मिल सके। हमारे आंकड़े हमको युवाओं के साथ काम करने के लिए बहुत प्रेरित कर रहे हैं, जिसमें उनके साथ बातचीत, जागरूकता अभियान जैसे कार्य किये जायें। इन प्रयासों को करने का एक अहम मकसद ये भी है कि युवा अपने दिल की बात सहजता से कर पाएं। आज ज़रूरत हैं युवाओं पर विश्वास करने की, उनके लिए अवसर बनाने की, जिससे आने वाली पीढ़ी पूरे विश्वास के साथ एक सार्थक दिशा में इस समय को ले जाए।

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