मनीषा शहारे:

महाराष्ट्र के गोंदिया ज़िले में विश्व आदिवासी दिवस पर सभी संगठन और सभी आदिवासी लोगों ने इकट्ठा होकर विश्व आदिवासी दिवस को त्योहार के रूप में मनाया। सभी ने बहुत उत्साह के साथ मिलकर यह कार्यक्रम का आयोजन किया। महिलाओं, लड़के-लड़कियों ने पीले रंग के पहनावे पहने और लड़के-लड़कियों ने मिलकर अपने आदिवासी नृत्य की तैयारी करके उसे अपनी कला के रूप में दर्शाया। यह आदिवासी समाज के द्वारा अपनी संस्कृति को संजोह के रखने का भी एक प्रयास था।

विश्व आदिवासी दिवस पर गोंदिया में रैली निकाली गई, संविधान की घोषणाएं (नारे) लगाए गए और जल, जंगल, ज़मीन के अधिकार को लेकर सभी ने अपनी बाते एक दूसरे के सामने रखी। इस कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के नेता, अलग-अलग वर्ग के शिक्षित लोग व लड़के-लड़कियों ने अपने सोच-विचार समाज के साथ साझा किए। आदिवासी समुदाय के क्या अधिकार हैं, उनके लिए क्या अलग-अलग योजनाएँ बनाई गई हैं, इस पर  भी चर्चा की गई। सभी ने संवैधानिक अधिकारों पर बात रखते हुए, हमारा अस्तित्व क्या है ये भी बातें की और सभी आदिवासी क्रांतिकारी लोगों को याद किया। 

‘वही समाज जिंदा रहता है जिस समाज को जिंदा रखने के लिए लोग तैयार रहते हैं। खुद को जिंदा रखने से ज़्यादा आने वाली पीढ़ी को जिंदा रखने के लिए किया जा रहा प्रयास ही हमारा मिशन है’ – ये क्रांतिवीर बिरसा मुंडा जी की बातें सभी को इस विश्व आदिवासी दिवस पर बतायी गईं। 

इन सभी चर्चा में यही निष्कर्ष था कि आदिवासी, मूलवासी हैं और जल, जंगल, ज़मीन से उनका रिश्ता बहुत पुराना है। आज देश की सत्ता आदिवासी समुदाय के खिलाफ जाकर, उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है। कईं संगठन व आदिवासी समुदाय के लोग इकट्ठा होकर अपने जंगल-ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं जिसमे सभी को अहम भूमिका निभाने की जरूरत हैं। 

विश्व आदिवासी दिवस के इस कार्यक्रम पर सभी ने निर्णय लिया कि पोस्टर-बैनर बनाकर आदिवासी समुदाय के खिलाफ हो रहे शोषण को सभी लोगों को बताने की जरूरत है। आदिवासी समाज को शिक्षित होना चाहिए, अपने अधिकार के लिए लड़ना चाहिए और संघर्ष करना चाहिए। कार्यक्रम को समाप्ति की ओर ले जाते हुए  सभी ने मिलकर शोषण-अत्याचार पर निषेध करने का संकल्प लिया। डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर के जय जयकार करते हुए यह विश्व आदिवासी दिवस को सभी ने मिलकर यादगार बनाया।

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  • मनीषा, महाराष्ट्र के गोंदिया ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। वह कष्टकारी जन आन्दोलन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रही हैं।

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