जवाहर लाल मेघवाल:

जय भीम, जय संविधान, ज़िन्दा‌बाद आप सभी को। मैं ग्राम उमण्ड, ब्लॉक कपासन, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) का निवासी हूँ।  मैं अपने बारे में यह बताना चाहता हूँ कि पहले मैं भी हमारे समाज के किसी आम व्यक्ति की तरह अन्धविश्वास, रुढिवाद, पुरुषप्रधानता, और धार्मिक मान्यताओं को मानने वाला व्यक्ति था। मैं साल 1999 के जनवरी महीने में सामाजिक बदलाव को ही अपने जीवन का आधार मानने वाले समाजसेवी, क्रांतिकारी और संघर्षशील विचारों के व्यक्तित्व वाले मेरे आदर्श खेमराज चौधरी के सम्पर्क में आया था।  प्रयास नाम की एक संस्था से साथ काम करने के दौरान मैं उनसे मिला था। 

सामाजिक बदलाव के उद्देश्य के साथ खेमराज के साथ 19 साल का करते हुए शिक्षा, दलित अधिकार, महिला सशक्तिकरण, दलित-आदिवासियों का खेती की ज़मीन पर अधिकार और सरकार के साथ सामाजिक मुद्दों पर पैरवी करने जैसे कामों में हमने अपनी भूमिका निभाई। इनमें से कुछ मुख्य काम थे – 2003 में कियारखेड़ा में दलितो का मन्दिर प्रवेश, 2004 में करजाली ग्राम पंचायत की जुनसुनवाई आयोजित करवाना, 2005 में 450 दलित और आदिवासी लोगों के साथ उनकी मांगों को लेकर चित्तौड़गढ़ से जयपुर तक पैदल यात्रा और 2007 में अचलपुरा में खाट आंदोलन।  

खेमराज जी के साथ रहकर मैंने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। उसके साथ रहकर मैंने सेखा कि हमें पूरे दिल से समाज में व्याप्त तमाम सामाजिक बुराइयों, भेद‌भाव, छुआछूत, अन्याय और शोषण के खिलाफ और संविधान प्रदत्त हमारे अधिकारों की रक्षा के लिए फील्ड में जाकर काम करना पड़ेगा। तभी बदलाव लाया जा सकता है। जब हम ज़मीन पर काम करेंगे तो चुनौतियाँ, सफलता और असफलता सभी हमारे रास्ते में आएंगी, लेकिन हमारे अनुभव ही हमें हर परिस्थिति का मुक़ाबला करना और आगे बढ़ना सिखाएँगे। खेमराज जी ने हमेशा निडर होकर लड़ना सिखाया, उन्होने ने सदा न्याय के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। वो कहते थे, “अगर समाज में कोई व्यक्ति पीड़ित है और रो रहा है और हम उसके लिए कुछ नहीं कर सकते तो हम उसके साथ बैठकर रो सकते हैं, उससे भी अगले व्यक्ति का दर्द कम होता है।” ऐसे महान विचारों के धनी थे खेमराज।   

मुझे अवसर मिला तो मैं जीवन भर आपके विचारों को लोगों तक पहुँचने का काम करता रहूँगा। आज भी हमारे समाज में असमानता, भेदभाव, छुआछूत, धार्मिक कट्टरता, अशिक्षा, शोषण, और महिला हिंसा जैसे गंभीर मुद्दे पैर जमाए खड़े हैं। हम सभी को अपनी क्षमता के अनुसार इनके खिलाफ काम करना चाहिए। यह सभी संविधान से मिले अधिकारों को पाने की राह में बड़ी बाधा हैं। हम सभी को संविधान के बारे में लोगों को बताना होगा और अधिकारों के प्रति जागरूक करना होगा। वही सच्चे अर्थों में खेमराज जैसे जुझारू सामाजिक कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि होगी।

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  • जवाहरलाल मेघवाल, चित्तौड़गढ़ से हैं और वहीं की एक संस्था नव निर्माण संस्थान के साथ काम करते हैं। वह अपने क्षेत्र में दलित-आदिवासी महिलाओं व बच्चों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए और सामाजिक शोषण, भेदभाव, छुआछूत, हिंसा और अत्याचार के खिलाफ समुदायों को साथ लेकर पैरवी का काम कर रहे हैं। दलित-आदिवासी बच्चों के सम्मानजनक नाम निकालने के लिए समुदाय के साथ संचालित 5 गरिमा नामकरण केंद्रों के साथ भी वह काम कर रहे हैं।

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