आशीष कुमार:

गीत-संगीत की अपनी एक निराली दुनिया होती है जो शौकिया शुरू होकर, एक दिन किसी की रोज़ी-रोटी का माध्यम बन जाती है। इसी संगीत की दुनिया में एक विधा हुआ करती थी जिसे हम लोग ‘ब्रास बैंड’ के नाम से जानते हैं। ब्रास बैंड की अपने जमाने में एक अनोखी पहचान हुआ करती थी, ज़्यादातर शादियों में ब्रास बैंड पार्टी को ज़रूर बुक किया जाता था। हमारे शहर फैज़ाबाद में हम सभी बचपन से ही देखते आये हैं कि शहर में काफी सारी ब्रास बैंड पार्टियाँ हुआ करती थी। अक्सर बैंड पार्टियों के नाम फिल्मी दुनियाँ से कम ग्लैमरस नहीं होते थे, जैसे शहर की सबसे पुरानी ब्रास बैंड पार्टी थी भारत वर्ष ब्रास बैंड। इसके बाद कुछ नए बैंड थे- सरस्वती ब्रास बैंड, जय महाकाल ब्रास बैंड, जुगनू ब्रास बैंड, न्यू इंडिया ब्रास बैंड पार्टी, जय हिंद ब्रास बैंड, प्रकाश ब्रास बैंड पार्टी, आज़ाद ब्रास बैंड पार्टी, नागिन ब्रास बैंड, आदि। 

एक समय हमारे शहर में लगभग 25 से 30 ब्रास बैंड पार्टी हुआ करती थी। ब्रास बैंड के साथ जुड़े लोगों का बहुत मान-सम्मान था, खासकर गायक कलाकारों के साथ बिलकुल आर्टिसटिक व्यवहार किया जाता था। एक सीजन में ब्रास बैंड पार्टियों में गाने बजाने वाले इन संगीत कर्मचारियों को अच्छी-खासी कीमत मिल जाती थी। इससे वह अपने घर का खर्चा आराम से निकाल लेते थे और काफी सारे बड़े काम भी इसके माध्यम से कर लेते थे, जैसे लड़कियों की शादी करना, ज़मीन खरीदना, मकान बनाना आदि। कई कलाकार तो पूरे सीजन का पैसा एडवांस ले लिया करते थे वह भी अपनी बोली पर, ब्रास बैंड पार्टी मालिक एडवांस में मुह माँगा पैसा लेते थे। 

उस समय ब्रास बैंड के कलाकारों की बहुत पूछ हुआ करती थी, तब इतनी महँगाई नहीं हुआ करती थी कम पैसे में भी अच्छे से गुज़ारा चल जाता था। बैंड पार्टी के इस काम में एक टीम की तरह काफी सारे लोग का सहयोग जुड़ा होता था, लगभग 8 से 10 लोग तो रोड लाइट उठाने वाले ही हुआ करते थे। एक ब्रास बजाने वाला, एक तूरमपीट बजाने वाला, एक साइड ड्रम बजाने वाला, दो झुनझुना बजाने वाले, एक सेट फ्रॉम, एक ढोल, एक व्यक्ति जुगनू कैसियो पर भी, इतने सारे लोग होते थे। हर ब्रास बैंड में दो मुख्य गाने वाले होते थे, दो जनरेटर पर और तार पकड़ने वाले भी। सभी को मिलाकर लगभग 20 लोगों की एक टीम होती थी। शाम को जब कोई भी ब्रास बैंड पार्टी तैयार होकर निकलती थी, तो सारे लोग बहुत ही मनमोहक व सुंदर लगते थे। सभी के पास अपनी बैंड पार्टी की ड्रेस हुआ करती थी जिसे पहनकर ब्रास बैंड सड़क पर मदमस्त होकर चलती थी। गाने बजाने में कौन से गीतों के साथ शुरुआत करनी है इसके लिए पूरी टीम के लोग अपनी दुकान या घर पर रिहर्सल किया करते थे और फिर शादी में पुराने गीतों की बौछार करते हुए बारात निकालते थे। 

उस समय कुछ गाने बहुत फेमस थे जिनको सभी ब्रास बैंड पार्टी वाले बजाते थे, जैसे “आज मेरे यार की शादी है”, “बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है”, “डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा”, “झनक झनक तेरी बाजे पायलिया” आदि। इस तरह के गीतों की माला के साथ शादी विवाह का कार्यक्रम सफल बनाया जाता था। खूब सारे फरमाइशी गाने भी बरातियों की तरफ से आते थे, यह लड़के के चाचा की तरफ से, यह फूफा की तरफ से, यह मामा की तरफ से, हम सभी को पता चल जाता था कि कौन फरमाइशी गाने को सुनने के बाद पैसा देने वाला है। उसके हिसाब से हम लोग गाना गाते थे। हाँ फूफा की फरमाइश पर जब गाना गया जाता था, तो उनकी जेब से सबसे कम पैसा निकलता था। 

शादियों के अलावा और भी कार्यक्रमों में ब्रास बैंड की बुकिंग होती थी, जैसे दुर्गा पूजा में विसर्जन के दिन सबसे आगे बैंड पार्टी ही होती थी, बैंड पार्टी के साथ ही मूर्तियां निकलती थी। दशहरे के बाद राम बारात निकालने तथा भरत मिलाप जैसे कार्यक्रम में भी इन बैंड पार्टी को काफी काम मिलता था। उस दौर में शहर में लोकगायकों और वाद्ययंत्रों को बजाने वालों का एक बड़ा समूह हुआ करता था। छुट्टियों के दिनों में इन कलाकारों की महफिले भी जमा करती थी, जहाँ गाने और बजाने दोनों तरह की कलाओं का संगम होता था। 

तकनीक की तारीफ करते हुए नई पीढ़ी और मौजूदा दुनियाँ ग्लोबल होने का दावा रोज़ पेश करती है। नई-नई तकनीकों के साथ नई चीज आने लगी, जिससे इन ब्रास बैंड पार्टियों के काम में काफी गिरावट आई है। अब तो ना के बराबर ही काम रह गया है, इस काम में अब डीजे फ्लोर ने बैंड पार्टी की जगह ले ली है। इसके आने के बाद कलाकारों को काफी तकलीफ हुई। ब्रास बैंड पार्टी के मालिकों ने डीजे का काम भी शुरू किया, कुछ डीजे का काम चला पाए, अधिकांश बंद ही हो गए। डीजे संचालन में लागत बहुत ज्यादा है और लोग बहुत ही कम लगते हैं। शोर बहुत हैं, सुरीली आवाज़ नहीं हैं। मेरा यह विश्वास है कि एक दिन यही खोए हुए कलाकार और खोई हुई ब्रास बैंड पार्टियाँ इस शोर-शराबे की दुनियाँ से मुक्ति दिलाएंगे। फिर से नया दौर आएगा, संगीत की ये दुनिया फिर से जगमगा जाएगी, फरमाइशी गाने फिर से गाए जाएंगे।

फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है; फोटो आभार: ड्रीम्स टाइम्स डॉट कॉम

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  • आशीष कुमार, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद ज़िले के रहने वाले हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला के साथ जुड़े हैं। आशीष अवध पीपुल्स फोरम से संस्थापक सदस्य हैं। वह खुद भी एक समय ब्रास बैंड पार्टी के साथ जुड़कर गाना गाया करते थे। आशीष अपनी एक संगीत मंडली बनाकर काम कर रहे हैं। मंडली, युवाओं के साथ उनके समता, बंधुत्व और हक अधिकार के मुद्दे पर काम करती है।
    आशीष गीत-संगीत के साथ विशेष लगाव रखते हैं।

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