उत्तर प्रदेश:

12 से 28 फरवरी तक चली विज्ञान प्रदर्शनी यात्रा 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर दिशा फाउंडेशन, कबीर पीस सेंटर एवं अवध युद्ध कलेक्टिव के द्वारा जौनपुर जिले के महरुपुर ग्राम सभा में स्थित जगमोहन पब्लिक स्कूल पर विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया I विज्ञान प्रदर्शनी के शुरुआत में ही राष्ट्रीय विज्ञान दिवस क्यों मनाया जाता है, इसकी शुरुआत कब हुई उस संबंध में विस्तार से संवाद स्थापित किया गया I विज्ञान प्रदर्शनी में यूनिवर्स की उत्पत्ति, धरती का बना जीव की उत्पत्ति और मानव का क्रमिक विकास अभिषेक सैकड़ो पोस्टर्स टांगे गए थे I इसके साथ ही “धरती कितनी बड़ी किताब, तुम भी इसको पढ़ो जनाब” और “पढ़ना लिखना सीखो ए मेहनत करने वालों, पढ़ना लिखना सीखो ए बोझा ढोने वालों”  गीत  “किताबें करती है बातें गुजरे जमाने की कविता के बैनर टांगे गए थे I यह कार्यक्रम  9 वीं और 11वीं के बच्चे के साथ में किया । बच्चों को पांच – पांच के ग्रुप में बांट कर क्रम से लगे हुए पोस्टरों जिसमें विशेष कर “जीवन की उत्पत्ति, और मानव का क्रमिक विकास”  से जुड़े पोस्टर लगाए गये थे, जिसे बच्चों द्वारा अपने ग्रुप के साथ पढ़ना था और उससे जुड़े सवाल लिखकर पूछने थे । विद्यालय में विज्ञान दिवस पर फिल्म के माध्यम से भी चर्चा किया गया I सभी विद्यार्थियों के लिए यह पहला अनुभव था और उत्साह के साथ में सभी विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया I

फैज़ाबाद में किशोरियों के साथ में भी अलग-अलग माध्यमों से विज्ञान दिवस मनाया गया I दिलकुशा केंद्र पर किशोरियों ने विभिन्न तरह के प्रयोग से विज्ञान को जाना और समझा I

झारखंड :

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर रांची ज़िले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बाजपुर में विज्ञान भित्तिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अपराह्न 12 बजे के बाद विद्यालय की प्रधान शिक्षिका उर्मिला केरकेट्टा की अध्यक्षता में महान वैज्ञानिक डॉ. सी .वी. रमन के तैल चित्र पर पुष्प अर्पण करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उन्होंने विद्यालय के सभी बच्चों को वर्तमान के समाज में विज्ञान के महत्व के बारे में बताया। इस अवसर पर सांइस फॉर सोसाइटी, झारखंड के सहयोग से विद्यार्थियों को विज्ञान संबंधित सिनेमा दिखाया गया। कार्यक्रम के संयोजक की भूमिका निभाते हुए सहायक अध्यापक अर्चना पाठक ने विद्यार्थियों को विज्ञान के महत्व बताते हुए कहा कि “मनुष्य आज चांद पर पहुँच पाया है तो सिर्फ विज्ञान के सहारे। समाज में अंधविश्वास और कुसंस्कार को दूर करने के लिए विज्ञान ही उचित माध्यम है। वैज्ञानिक चेतना ही एक स्वस्थ और जागृत समाज बना सकती है।” इस कार्यक्रम में स्कूल के कई विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को कलम और स्वल्पाहार देकर सम्मानित किया गया। स्कूल के सह प्राध्यापिका हेमंत केरकेट्टा ने अंत में सभी को धन्यवाद दिया।

छत्तीसगढ़ : 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शासकीय माध्यमिक विद्यालय आमाडांड, शासकीय हाई स्कूल आमाडांड, विकासखंड खड़गवां, जिला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (एमसीबी) छत्तीसगढ़ में दिनांक 28 फरवरी 2024 को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों के साथ विज्ञान दिवस मनाया गया।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की सभा की तैयारी विद्यालय के शिक्षक श्री जगरनाथ नाहक द्वारा किया गया था। सभा का उद्घाटन भाषण माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक हरनारायण यादव ने दिया। उन्होंने बच्चों को बताया की आज विज्ञान की वजह से ही हम लगातार हर क्षेत्र में तरक्की करते जा रहे हैं जैसे स्वास्थ्य – परिवहन – संचार- मनोरंजन व कृषि में विकास यह सब विज्ञान से ही संभव हो सका है यह युग विज्ञान का युग है इसके बिना हम एक कदम भी नहीं चल सकते विज्ञान हमें प्रश्न करना सीखता है और उसका समाधान निकलने में सहयोग करता है।

उपस्थित बच्चों के बीच गिरीश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुरुआत 1987 से किया गया इस दिन हमारी सरकार विभिन्न थीम पर आगामी कार्यक्रम निर्धारित करती है इस वर्ष 2024 का थीम ‘ विकसित भारत के लिए भारतीय स्वदेशी प्रौद्योगिकी ‘ रखा गया है।  रमन इफेक्ट की खोज आज ही के दिन  दिनांक 28 फरवरी 1927 को किया गया था जिस कारण से हम आज पूरे देश में विज्ञान दिवस मानते हैं।

धरती व जीवन की उत्पत्ति, विभिन्न भाषाओं का विज्ञान व विकास का सफर, खेती की शुरुआत से अब तक सूचना क्रांति युग में कम्प्यूटर व मोबाइल के उपयोग में विज्ञान के योगदान के विषय में जानकारी प्रदान किया गया । उन्होंने बताया कि धरती में सभी जीवो में इंसान ही ऐसा जीव है जो सोच सकता है और उसके अनुरूप कार्य कर सकता है । विज्ञान ने हमें अंधेरे से निकाल कर प्रकाश में लाया है। विज्ञान हमारे पूरानी जड़ पारंपरिक सोच, अंधविश्वास या रूडीवादी  पिछडी सोच से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करता है तथा शोषण से मुक्त करने  सहायक होता है।

धरती व जीवन की उत्पत्ति के संबंध में बच्चों के बीच एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया। डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शन के पश्चात बच्चों ने उससे जुड़े प्रश्न रखें तथा उनके प्रश्नों का उत्तर दिया गया।

विज्ञान दिवस पर  स्कूल के बच्चों ने प्रतीक रूप से  पौधे का रोपण कर धरती को बचाने के लिए संकल्प लिया।

राजस्थान:

राजस्थान राज्य के झिरी और गंगागुड़ा इलाके में विज्ञान दिवस पर सरकारी स्कूल के बच्चों एवं शिक्षकों के साथ चर्चा किया गया। 8 साल से लेकर 21 साल तक की बालिकाओ ने भाग लिया और साइंस दिवस के बारे में जाना I बालिकाओ ने इस बात पर ज़ोर दिया की विद्यालय में हर साल साइंस दिवस बनाया जाना चाहिए I

विज्ञान दिवस पर बालिकाओं के साथ मीटिंग में चर्चा की गयी जिसमें विज्ञान दिवस क्यों मनाया जाता है और  सबसे पहले कब मनाया गया आदि जानकारी दी गयी I सभी बालिकाओं ने इसके आधार पर अपनी-अपनी किताबों से चित्र बनाएं, वैज्ञानिकों की जीवनी याद की, उनके बारे में जाना और अपने ग्रुप में बच्चों के साथ सवाल जवाब किया I

टीचर्स ने भी खूब रूचि के साथ में विज्ञान दिवस में भाग लिया I पोस्टर्स और अलग-अलग उदहारण के माध्यम से उन्होंने बच्चो के सामने बहुत सी साँझा की और उनको वैज्ञानिक चेतना व सवाल पूछना क्यों ज़रूरी है, इसके बारे में बताया I

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