लाल प्रकाश राही :
हम पौधे और बीज लगाते है, वे शाखाएं लगाते हैं,
हम धान रोपते हैं और फसल उगाते हैं,
वे कीलें रोपते हैं और धन उगाते हैं।
हम प्रेम और किताबें बांटते हैं, वे त्रिशूल और तलवारें
हम विद्यालय और घर बनाते हैं वे, मंदिर और शिवालय
हम दुनिया को प्यार और फूलों से सजाने में लगे हैं,
वे युद्ध और बाज़ार को स्थापित करने में।
हम ज्ञान और मुहब्बत की रोशनी में जीना चाहते हैं,
वे अज्ञानता, और नफ़रत का अंधेरा स्थापित करना चाहते हैं।
हम जीतना जानते हैं, सभी का दिल प्रेम और अहिंसा से
वे हमें दौलत के रोब और सत्ता की ताकत से डराने में लगे हैं ।
जबकी वे जानते हैं, अंततः प्रेम और मानवता की जीत होती है
फिर भी वे हमें नेस्तनाबूद कर देने पर आमादा हैं।
हम हैं कि हर बार धरती का सीना चीर कर उग आते हैं
एक नये पौधे एक नई दूब की तरह एक नई ताजगी के साथ I

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