अमित फॉर युवानिया डेस्क:
हसदेव क्षेत्र के नागरिक पिछले 12 सालों से सिर्फ अपने जंगल, ज़मीन को बचाने के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि हसदेव नदी, पर्यावरण, वन्य जीव और हम सभी की सांसों को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। एक दशक से से भी लम्बे समय से कानूनों पर विश्वास करके लोकतांत्रिक तरीके से हसदेव के आदिवासी आंदोलनरत है लेकिन सरकार दमन करके अन्याय पूर्वक उनके जंगल, जमीन छीन रही है। इन जंगलों से करोड़ो रुपए के लघु वनोपज निकलते हैं, जो कई पीढ़ियों तक चलेंगे, आक्सीजन मिलती है, पानी मिलता है लेकिन सरकारों को विकास के नाम पर सिर्फ कोयला ही निकालना है। जबकि हसदेव अरण्य का क्षेत्र, पांचवी अनुसूचि वाले क्षेत्रों में आता है और यहाँ की ग्राम सभाओं ने कभी भी खनन परियोजनाओं को सहमति नहीं दी है।
संघर्ष के साथियों ने एक गीत व विडियो भी बनाई है –
इतने लम्बे अरसे के संघर्ष के बावजूद, हाल ही में हसदेव के जंगलों में एक बार फिर से आवंटित खदान के लिए, बल पूर्वक कटाई की गयी है। स्थानीय नागरिकों के भारी विरोध के बावजूद भी कई हज़ार पेड़ काट दिए गए हैं। इसकी एक छोटी सी रिपोर्ट आप यहाँ देख सकते हैं –

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