दिपक कांबळे:
संविधान आपल्या जीवनाबरोबर आणि जीवनानंतरही आहे। आपल्या जन्मा आधीपासून ते मृत्यूनंतर सुद्धा संविधान आपल्या सोबत असते, आपल्या हितासाठी विकासासाठी, आपल्या हक्काच्या संरक्षणासाठी, माणूस म्हणून जगण्यासाठी संविधान समजून घेणे महत्त्वाचे आहे। भारतीय संविधान प्रत्येक भारतीयाचा सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ आहे। त्यामुळे हा ग्रंथ समजून घेणे काळाची गरज आहे त्यामुळे संविधान वाचणे व जाणून घेणे खरी गरज आहे। अहमदपूर तालुक्यातील वायगाव बोडखा सय्यदपूर वळसंगी मांडणी या गावात दिपक कांबळे याच्या माध्यमातून महिलांना संविधान निर्मिती कशी झाली संविधान सभेत कोणकोणत्या व्यक्तीचा समावेश होता। संविधान निर्मीती साठी किती कालावधी लागला।
संविधान उद्देशिका काय आहे। संविधान उद्देशिकेचे सामूहिक वाचन, आणि वाटप, करून संविधानिक मूल्य स्वातंत्र्य, समता, न्याय, बंधुता, लोकशाही, धर्मनिरपेक्षता, त्याचबरोबर मूलभूत हक्क समानतेचा हक्क, स्वातंत्र्याचा हक्क, शोषणाविरुद्ध लढण्याचा हक्क, धर्म स्वतंत्र्याचा हक्क, शैक्षणिक व सांस्कृतिक हक्क, न्यायालयात दाद मागण्याचा हक्क, या बाबी महिला समजून घेत आहेत संविधानामुळे महिलांची प्रगती कशी झाली याविषयी महिला बैठकीच्या माध्यमातून महिला चर्चा करत आहेत व संविधानिक मूल्य संविधान उद्देशिका याचे माहिती समजून घेताना संविधान संविधानिक मूल्य व आपल्या जगण्याचा संबंध कसा आहे। याची चर्चा बैठकीत करत आहेत गावागावातून संविधान समजून घेऊन इतर महिलांना संविधानिक मूल्य सांगण्यासाठी महिला नेतृत्व तयार होत आहे। गावागावातून महिला संविधान साक्षर होणे काळाची गरज आहे गाव खेड्यातील प्रत्येक जण माणसाला संविधानाचा अभ्यास करणे काळाची गरज आहे। भारतीय लोकांचा सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ हा आपल्या देशाचे संविधान आहे आपला देश सुरक्षित ठेवायचा झाला तर संविधान वाचणे जाणून घेणे खरी गरज आहे दिपक कांबळे च्या माध्यमातून संविधानिक मूल्य महिला समजून घेत आहेत।
हिंदी अनुवाद –
संविधान हमारे जीवन के साथ भी है और जीवन के बाद भी। संविधान हमारे जन्म से पहले से लेकर मृत्यु के बाद भी हमारे साथ है, हमारे विकास, हमारे अधिकारों की सुरक्षा, एक इंसान के रूप में जीने के लिए संविधान को समझना बहुत ज़रूरी है। भारत का संविधान प्रत्येक भारतीय का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसलिए, इस पुस्तक को समझने में समय लगता है, इसलिए संविधान को पढ़ना और जानना वास्तविक आवश्यकता है। अहमदपुर तालुका के वैगाँव बोडखा सैयदपुर वलसंगी मंदानी गाँव में दीपक कांबले ने महिलाओं का जोड़कर, उनके साथ संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ानी शुरू की है। चर्चाओं में संविधान सभा में किसे शामिल किया गया था; संविधान बनाने में कितना समय लगा; संविधान के प्रेरणास्त्रोत क्या रहे, संविधान का उद्देश्य क्या है, इत्यादि पर भी बातचीत की जाती है।
संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन और स्वतंत्रता, समानता, न्याय, बंधुत्व, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक मूल्यों के साथ-साथ मौलिक अधिकारों, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के खिलाफ लड़ने का अधिकार का वितरण किया गया। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकार, अदालत में अपील करने का अधिकार, इन सब पर भी बात हुई। महिलाएं इन मुद्दों को समझ रही हैं, महिलाएं संविधान के कारण कैसे आगे बढ़ीं, इस पर महिला बैठकों के माध्यम से चर्चा कर रही हैं, और संविधान के संवैधानिक मूल्यों की जानकारी समझ रही हैं, संविधान, संवैधानिक मूल्य और हमारे जीवन के बीच कैसा संबंध है, बैठक में इस पर चर्चा की जा रही है और महिला नेतृत्व को गाँव-गाँव तक संविधान को समझने और संवैधानिक मूल्यों को अन्य महिलाओं तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है। गाँव-गाँव तक महिलाओं का संविधान के प्रति जागरूक होना, यही समय की मांग है। गाँव के हर व्यक्ति का संविधान का अध्ययन करना समय की मांग है। भारतीय लोगों की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक हमारे देश का संविधान है। यदि हमें अपने देश को सुरक्षित रखना है तो संविधान को पढ़ना-जानना एक वास्तविक आवश्यकता है।

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