संदीप कुमार:
मुझे जो अ से ज्ञ तक आता है,
उसका पूरा श्रेय मेरी मां को जाता है।
मैंने जीवन में जो भी कामयाबी पाई है
हाँ मैंने अपनी मां के हाथ से बनी रोटी खाई है।
मैं अगर जरा सा बीमार हो जाऊँ,
तो उसकी आँखें भर आती हैं।
और यदि मैं कोई शैतानी करूँ तो,
मुझे मारते-मारते उसकी चूड़ियां टूट जाती हैं।
लोगों की नज़रों से बचाने के लिए,
मुझे काजल का काला टीका लगाती है।
और मुझ पर कोई मुसीबत आ जाए तो
वह मुसीबत को डांट भागाती है।
वैसे तो मुझे दैनिक परेशानियों,
को सोचकर नींद नहीं आती।
पर माँ की गोद में सर रखता हूँ,
तो सारी परेशानियाँ छूमंतर हो जाती हैं।
मैंने कई देवी-देवताओं के सामने सर झुकाया है,
पर मेरा राजा बेटा खूब आगे बढ़े,
यह आशीर्वाद केवल अपनी माँ से पाया है।

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