एडवीन टोप्पो:

गुमला जिला के बरवे क्षेत्र में पर्यटक स्थल के नाम पर चल रहे सुंदरीकरण योजना का विरोध और संकल्प की कहानी।     

यह मेरे गाँव की कहानी है जो कि एक जाना-माना पर्यटक स्थल है। रांची से 225 किलोमीटर की दूरी पर गुमला जिले के अकाशी पंचायत में आने वाला हमारा गाँव, सरना भाई-बहनों का बहुत बड़ा पूजा स्थल है, जो सिरा सीता का नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ पर बड़ी संख्या में लोग पूजा करने जाते हैं, सरना भाई-बहनों के मुख्य पूजा स्थल ककड़ो लाता, धर्मे कंडो, डबनी चुवा में आने वाले लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए, यह मांग की गई कि हमारे धार्मिक स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए और राज्य पर्यटक विभाग ने उसको कर भी दिया। लेकिन इस बारे में स्थानीय गाँव वालों को पता नहीं था और इसका उन्होने खूब विरोध किया। गाँव के लोग इस तरह की योजनाओं को अपना तरीके से करना चाहते थे।  

स्थानीय लोगों ने सरना धर्म के बड़े अधिकारियों के सामने अपनी बातों को रखा कि पूजा स्थल पर कोई सुंदरीकरण नहीं किया जाए। लेकिन सुंदरीकरण करने के लिए लोग वहाँ खड़े हुए थे और गाँव की सार्वजनिक ज़मीन को लेना चाहते थे। अंततः ग्रामीणों के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो पाया। तो सरकारी अधिकारियों ने गाँव के लोगों को बहला-फुसलाकर अज्ञात व्यक्ति का जमीनों को लेने लगे और लालच में आकर गाँव के कुछ लोगों ने जमीन दे दी थी। लेकिन जो पूजा स्थल है, गाँव वालों ने उस स्थल पर किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ ना करने तथा पहले से जिस तरह है वैसे ही रखने की मांग की। इस मांग की वजह से से गाँव के लोगों को तरह-तरह की धमकी आने लगी। गाँव वाले चाहते थे कि विकास अपने अनुसार हो; कौन सी जगह पर क्या बनाना है, क्या क्या बनना है और कहाँ-कहाँ बनानी है। अपनी इस बात को उन्होने बताया लेकिन सरकारी अधिकारियों ने गाँव वालों का बात नहीं मानी। इसका गाँव वालों ने   घोर विरोध किया और सफल भी हुए।

गाँव के ही कुछ लोगों को, कुछ दिन के बाद, वे अपनी ओर शामिल करके काम करवाने की कोशिश करने लगे लेकिन भी उन्हें सफलता नहीं मिली। गाँव वालों का मानना है कि यह स्थल जिस तरह से पहले से है, उसी तरह रहेगा। उसको किसी भी प्रकार से छेड़छाड़ ना किया जाए, नहीं तो हम लोग का देवता नाराज हो जाएगा। बाहर से पूजा करने वाले लोग भी इसका समर्थन किया। उनको लगा कि इस तरह का योजना लाकर सरकार बाहिरियों से आक्रमण कराना चाहती है। यह काम अभी तक खूब जोरो से हो रही है। सरकार की योजनाओं में दुकान ,सड़क ,रेस्ट हाउस बनाने की भरपूर कोशिश कर रही है। इसमें सड़क के अलावा दूसरी योजनाओं को मंजूर नहीं कर रहे हैं क्योंकि गाँव वालों का निर्णय और इच्छा है कि गाँव का विकास उनके अनुसार हो। कहाँ क्या बनना है इसका गाँव निर्णय लेगा। अतः यह योजना रुकी हुई है। 

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  • एडवीन, झारखण्ड के गुमला ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह केंद्रीय जन संघर्ष समिति के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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