उत्तराखंड में अंधविश्वास की स्थिति

गोपाल लोधियाल: 

उत्तराखंड में अंधविश्वास की स्थिति का अगर विश्लेषण किया जाए तो अंधविश्वास लगातार फल-फूल रहा है और इस धंधे में लगे हुए लोग भी बहुत मजबूती के साथ फल-फूल रहे हैं।  यहां कुछ लोग इस धन्दे को व्यापक रूप से फैला रहे हैं। इनके अंधविश्वास को फैलाने के कई तरीके हैं – 

यहाँ पर अधिकतर लोगों की आजीविका खेती किसानी से होती है और पूरी भौगोलिक स्थिति पहाड़ी होने के कारण लड़कियों और महिलाओं को गाड़-गधेरो (नदी-नाले) पार कर आना-जाना होता है। कठोर शारीरिक श्रम और पौष्टिक खान-पान ना मिलने की वजह से यहां अधिकतर महिलाएं एनिमिक और कमज़ोर हैं। लोगों का अंधविश्वास यह है कि इन्हें मसान लगा है या फिर पिचास लगा है। इसको ठीक करने के लिए यह लोग आम लोगों से मोटी रकम ऐंठते हैं और इसके साथ-साथ बकरा, मुर्गा और शराब जैसी तमाम तरह की चीजें भी लेते हैं। एक अंधविश्वास जो अभी लोगों के बीच में बहुत प्रचलित है वह है पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जमीन और पैसे का लिया जाना।

यहाँ पर महिलाओं की माहवारी को लेकर भी अंधविश्वास है, इसे कई लोग छूत का रोग मानते हैं जिसे लेकर महिलाओं के साथ जबरदस्त भेदभाव किया जाता है। आज भी कई इलाकों में महिलाओं को रहने के लिए जानवरों की गोठ (गौशाला) में 4/5 दिन रहने को भेज दिया जाता है, लगातार गोमूत्र का छिड़काव किया जाता है। पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत इलाकों में माहवारी होने वाली लड़कियों और महिलाओं को गांव के बाहर एक झोपड़ी में रखा जाता है और वहां पर इन महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण जैसी घटनाएँ भी सामने आई हैं। 

लगातार गाँव के अंदर जागरी (देवताओं का आवाहन) और तमाम तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर चमत्कार दिखाकर लोगों के अंदर इन व्यवस्थाओं को मान्यता देने के लिए लोगों के दिल दिमाग के ऊपर चमत्कारों की महानता स्थापित करने का काम किया जाता है।

इन सब चीजों के समाधान को लेकर हमारा ग्रुप साइंस फॉर सोसायटी खासकर स्कूली बच्चों और महिलाओं के बीच में चमत्कार के पीछे का विज्ञान, चमत्कार दिखाकर समझाने का काम करता है। लोगों के बीच में इस बात को प्रमाणिकता के साथ रखने की कोशिश की जाती है कि किस तरह से चमत्कार दिखाने वाले लोग स्वयं विज्ञान का इस्तेमाल कर लोगों को मूर्ख बनाने का काम करते हैं। साथ ही इन चमत्कारों के पीछे के विज्ञान को लोगों के बीच में रखने का काम यह ग्रुप करता है। चमत्कारी घटनाओं को वैज्ञानिक तथ्यों के उदाहरण सहित लोगों के बीच सरल भाषा में इसे फैलाने का काम किया जाता है। इसके साथ-साथ वैज्ञानिक चेतना को बढ़ाने को लेकर बच्चों के बीच ज्ञान-विज्ञान की क़िताब को पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित किया जाता है। स्थानीय भौगोलिक विज्ञान को समझने को लेकर स्कूल कॉलेजों में वैज्ञानिक चेतना फैलाने का काम हमार संगठन करता है।

फोटो आभार: न्यूज़क्लिक

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  • गोपाल उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह अपने क्षेत्र में वन पंचायत संघर्ष मोर्चा से जुड़कर स्थानीय समुदायों के हक़-अधिकारों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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