युवानिया डेस्क:

हसदेव अरण्य, देश के मध्यपूर्व के छत्तीसगढ़ राज्य में आने वाला एक सघन वन क्षेत्र है। करीब 1 लाख 70 हज़ार हेक्टेयर इलाके का यह वनक्षेत्र छत्तीसगढ़ के तीन जिलों सरगुजा, कोरबा और सूरजपुर में फैला हुआ है। अपनी समृद्ध वन संपत्ति, जैव विविधता और पर्यावरण की महत्ता के चलते 2010 में ‘नो गो’ क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद भी यहाँ के 762 हेक्टेयर इलाके को खनन के लिए खोल दिया गया। 2022 में पहला चरण समाप्त हो जाने के बाद अब और 1,136.328 हेक्टेयर इलाके में दूसरे चरण के खनन के लिए स्वीकृति दे दी गई है। हसदेव के जंगलों में रहने वाले लोग खनन के खिलाफ शुरू से ही संघर्ष कर रहे हैं। ध्यान रहे की यह एक आदिवासी बहुल इलाका है और पाँचवी अनुसूची क्षेत्र में भी आता है।

पूर्व में हुए खनन से इस इलाके लोगों के साथ-साथ इस इलाके, देश और धरती के पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की बात तो छोड़ ही दीजिये, आने वाले समय में प्रस्तावित खनन से जो नुकसान पहुंचेगा उसकी कल्पना भी भयावह है। आइये समझते हैं हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए इलाके के लोगों के संघर्ष के साथ शुरूआत से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला से कि आखिर यह पूरा मुद्दा क्या है? कौन लोग हैं जो लड़ रहे हैं? और आखिर लोगों के अधिकारों का दमन कर और देश के तमाम क़ानूनों, और न्यायिक संस्थाओं को नज़रअंदाज़ कर के खनन करने वाले लोगों के असल इरादे क्या हैं?

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