जतिलाल सोलंकी:

बहुत पुराना है यह वट वृक्ष,
घना जंगल था इसके आसपास।

प्रातः काल सूर्य उदय के समय,
गूंजती थी पक्षियों की आवाज। 

कुछ साल पहले, 
बसते थे हजारों आशियाने,
इस वट वृक्ष पर।

बड़ी चाव से इसके फलों को,
खाते हैं चमगादड़ व अन्य पक्षी।

अब न रहा घना जंगल,
न रहें पशु पक्षी,
पता नहीं कहाँ चले गए,
वे सारे जीव जंतु।

जंगल का पारिस्थितिक तंत्र,
होने लगा है असंतुलित।

पृथ्वी को हरा भरा, 
रखना है ज़रूरी,
तभी बच पाएगा, 
हमारा जीवन।

फीचर्ड फोटो आभार: पिक्साबे

Author

  • जतिलाल मध्यप्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं। वर्तमान में वह यूजीसी-नेट की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। साथ में जतिलाल ‘कलाम फाउंडेशन’ के साथ जुड़ कर भी काम कर रहे हैं।

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2 responses to “एक पेड़ ज़िंदगी के नाम”

  1. Gopal Patel Avatar

    आदरणीय ज्योति लाल सोलंकी को बहुत-बहुत बधाई हो आपकी कविता को युवानिया पत्रिका द्वारा प्रकाशित करने के उपलक्ष में आपको अग्रिम शुभकामनाओं के साथ और भी आगे प्रकृति के प्रति हमेशा सजग और तत्पर रहें ।आने वाली पीढ़ी को एक प्रेरणा पुंज मिल सके। जो व्यक्ति प्रारंभिक जीवन से ही प्रकृति से जुड़ा हुआ है उसके अंतर्मन या रग – रग में प्रकृति के विद्यमान है। प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है लेकिन हम प्रकृति के प्रति आज भी सजक नहीं आवश्यकता है कि युवाओं के नवाचार के माध्यम से प्रकृति को संरक्षण के कार्य को और अधिक से अधिक बल देना चाहिए।🙏🙏🙏🙏

    1. Jatilal solanki Avatar
      Jatilal solanki

      Mere Param Mitra Gopal Patel ko supporting ke liye bahut dhanyvad gopu🙏🏻😊

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