अखिलेश:

वैक्सीन को लेकर समाज में लोग अलग-अलग तरह की बातें सोचते हैं। जो लोग बाज़ार में रहते हैं, जो शिक्षित परिवार से हैं, वह सोचते हैं कि वैक्सीन लगना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि वैक्सीन से कोरोना नहीं होता है। वैक्सीन लगाने से कोरोना से लड़ने की छमता ज़रूर बढ़ती है, लेकिन वैक्सीन लगा भी लिए हैं तब भी मास्क लगाना और दूरी बना के रखना बहुत ज़रूरी है।

गाँव-देहात में बहुत कम ही लोग वैक्सीन लगाए हैं। बहुत सारे लोगों के मन में है कि वैक्सीन लगाने से कोरोना वायरस फैलता है, लोग बिमार पड़ जाते हैं और फिर उनकी मौत हो जाती है। इस कारण से काफ़ी लोग वैक्सीन नहीं लगाना चाहते हैं। बहुत सारे युवाओं के मन में ये भी है कि वैक्सीन लगाने से शादी के बाद पत्नी को बच्चा पैदा नहीं हो पाएगा, सब दीन (हमेशा) के लिए बांझ हो जाएगा। बहुत सारे लोगों ने तो अस्पताल भी जाना बंद कर दिए हैं। यहाँ पर बहुत सारे अस्पतालों में करोना मरीज़ को भर्ती लेने के लिए कोई भी सुविधा की व्यवस्था नहीं है, और ना ही किसी प्रकार की सरकारी एम्बुलेंस और ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध है।

हाट-बाज़ार में लोग बिना मास्क पहने और सावधानी बरते घूम रहे हैं

बस्ती के दलित परिवारों से बात करने पर यह जानकारी मिली है कि गाँव के लोग वैक्सीन लगाने से डरते हैं, क्योंकि ज़्यादातर लोग गरीब परिवारों से हैं। लोगों का कहना है कि हम लोग, रोज़ कमाने-खाने वाले लोग हैं, अगर वैक्सीन ले लेंगे तो बीमार पड़ जाएंगे और अगर बीमार पड़ गए तो हमारे बच्चों और परिवार को कौन राशन-पानी देगा? कौन बनाके खिलाएगा हम लोगों को? हमारे लिए तो सरकारी अस्पताल भी अच्छे नहीं हैं, और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए रुपये भी नहीं है। फिर हम लोग क्यों वैक्सीन लगवाएं? 

कई महिलाएं ये भी सोचती हैं कि इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती होने पर कहीं-कहीं इज्जत भी लूट लिया जाता है। कुछ लोग किसी का किडनी निकाल लेने की बात करते हैं और प्रशासन, थाना या पुलिस को शिकायत करने पर कोई कार्रवाही भी नहीं होती है। इसलिए लोगों का कहना है कि हम लोग जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे, लेकिन वैक्सीन नहीं लगाएंगे। वहीं जिन लोगों ने वैक्सीन लिया है उनका कहना है कि शरीर में जहाँ पर वैक्सीन लगाया है, वहाँ पर दर्द होता है। बुखार, और सिर में हल्का दर्द भी होता है, लेकिन इससे घबराना नहीं चाहिए और वैक्सीन जरूर लगाना चाहिए। बहुत से क्षेत्रों में यह भी देखने को मिला है कि लोगों में करोना का कोई डर नहीं है, लोग बिना मास्क लगाए हाट-बाज़ार जा रहे हैं, प्रशासन भी इसकी कोई देख-रेख नहीं कर रहा है।

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  • अखिलेश, बिहार के अररिया ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। गाने लिखना, गाना और सबको खेल खिलाने में माहिर। जन जागरण शक्ति संगठन के साथ मिलकर अपने समुदाय के लिए काम करते हैं।

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