जौनपुर, उत्तर प्रदेश से लॉकडाउन में गाँव की कहानी, साथी की ज़ुबानी

रवि गौतम :

हेलो दोस्तों मेरा नाम रवि गौतम है। एक दिन मेरे एक साथी ने बताया, “यार भाई इस कोरोना लॉकडाउन की वजह से गरीब लोग बड़े परेशान हैं। खाने के लिए खाना नहीं है, दवा के लिए पैसा भी नहीं है क्योंकि कोई काम चल ही नहीं रहा है।” तो मैंने उससे कहा कि चलो फिर कुछ करते हैं उनके लिए। एक शाम को सभी साथियों को बुलाया गया और उनके सामने यह बात रखी गई, सभी साथियों ने अपनी सहमति दी और पैसे इकट्ठा किए।  इस पैसे से हमने सूती कपड़ा खरीदकर उनसे मास्क बनवाए और उनका वितरण किया। कुछ लोगों ने चावल, और गेहूं देकर भी सहयोग किया। 

महामारी के इस समय में राशन और पैसे की बहुत ज़्यादा ज़रूरत थी, ऐसे में हमें ध्यान आया कि हमारे एक साथी दिशा नाम के संगठन के साथ काम करते हैं। हमने दिशा से जुड़े साथी लाल प्रकाश ‘राही’ भाई से बात की और उन्होंने ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए राशन देने की बात कही। इस तरह उन्होने आटा, चावल, तेल, साबुन, दाल, मसाला और नमक आदि देकर सहयोग किया। 

एक दिन मैं और मेरा साथी सुमित भारती हम दोनों, लोगों को किन चीजों की ज़रूरत है इसकी पूछताछ करने के लिए निकले। यह हमारे लिए ज़रूरी भी था क्यूंकी हम लोग तो बस पढ़ाई करने वाले लड़के हैं और हमारे पास लोगों की मदद करने के लिए कोई बहुत ज़्यादा पैसे भी नहीं थे। लोगों से बात की तो पता चला कि किसी के पास राशन कार्ड नहीं है तो किसी के पास खेती की ज़मीन नहीं है। 

हमें लगभग 15 से 20 ऐसे परिवार मिले जिनके पास ना तो खेती की ज़मीन थी और ना ही राशन कार्ड। ये लोग लॉकडाउन में क्या खाते रहे होंगे? इस तरह लोगों को राशन देते-देते हम दूसरे गांव में पहुंचे तो वहां के कटिहार के बेटे से हमारी झड़प हो गई। वह गुस्से से आगबबूला हो रहा था और उसने हम लोगों की बेइज्जती कर हमें वहाँ से भगा दिया, लेकिन किसी ने भी उनकी बातों का बुरा नहीं माना और हम लोग दूसरे गांव पहुँच गए।  

दूसरे गांव में राशन बांटने के दौरान हमने देखा कि एक परिवार के पास तो पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे। एक मैला कपड़ा जो कि काफी फटा हुआ था, वही उन लोगों ने पहना हुआ था। हम लोग भी देख कर क्या करते, हमारे पास उनको कपड़े देने के लिए तो कोई पैसा था नहीं, तो हम उस गाँव में राशन बांटकर घर चले आए।

हमारे इस काम के दौरान कुछ लोगों ने बहुत आलोचना भी की लेकिन किसी भी साथी ने हिम्मत नहीं हारी। हम लोगों ने बहुत दृढ़तापूर्वक काम किया। हम सभी साथियों ने मिलकर हमारे गांव में नव उदय जनमंच नाम से एक ग्रुप बनाया है और हम सभी हर मुद्दे पर लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हमारे साथियों के नाम हैं: प्रतिभा, अंजली, रोशनी, आरती, अंतिमा, पंकज, आकाश, राजन, प्रवीण, शुभम भारती, अंकित, नीरज, रोहित, पवन, विवेक, शुभम कुमार, रवि कुमार, विकास, रानी, विक्रांत, अविनाश, शैलजा, प्रवीण, एकता, रवि गौतम और सुमित भारती। 

धन्यवाद।

फीचर्ड फोटो आभार: आर्ट स्टुडियो यूट्यूब

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  • रवि गौतम, जौनपुर के युवा साथी हैं और दिशा संगठन से जुड़े हैं। अलग-अलग पहेलियों और प्रश्नों में उलझाने में माहिर रवि, सामाजिक परिवर्तन शाला से भी जुड़े हैं।

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