जलेश्वर महतो: आसार सावन भादों, होवत नखे खेत कादो,खेत में बीड़ा सुखथे,आरी बैठी किसान रोजे कांदथे,कहत में बीड़ा सुखथे…… ।।1।।… READ MORE
पावनी: छूना है आसमान, उन उड़ते परिंदों की तरह,मुझे भी एक दिन..। उन छोटी-बड़ी मछलियों की तरह,देखनी है सागर की गहराइयाँ,मुझे… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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