रोहित बाग: ସୁନା ରଗେଂ ରଗେଂଇ ହେଇ କେତେ ସୁନ୍ଦର ଦିସୁଥିଲା କ୍ଷେତଦେଖି କରି ଚାଷୀ ଭାଇର ପୁରି ଯାଉଥିଲା ପେଟ୍ଆରୁ କେତେ ଦିନ୍ ଗଲେ ହେଇ… READ MORE
डोलामणी: ତୁଇ ପାଠ୍ ନେଇ ପଢି ବୋଲି ତୋତେ ସୋଷଣ କରୁଛନ୍ତୁଇ ନାଇ ଜାନୀ ବୋଲି ଦଲାଲ ତତେ ଠକୁଛେ.ତୁଇ ଗରୀବ ବିପିଏଲ୍ ବଲି ସରକାରୀ ବାବୁ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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