सबिता बनर्जी : दरिंदगी में पिसती बेटियां,कभी निर्भया, कभी संजली,कभी फुलन, कभी मधुमिता,ये तो वो नाम हैं जो दरिंदगी की… READ MORE
तन्मय और शो: शो: हम्म…मेरे आंगने में तुम्हारा क्या काम है? तन्मय: क्या बात है… सुबह-सुबह रेडियो चालू? शो: अरे…… READ MORE
मोहन सिंह: जब से बनी रे सरकारलूट रही जनता को – 2जनता को भाई जनता को – 2 मनमाने कानून बनाए.. जनता की… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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