बस चीज़ें बटोर लेने से आसान नहीं होता जीवन का सफर

फ़हीम अंसारी:   एक दिन एक बुनकर सेठ के दो कारीगर आपस में विभिन्न मुद्दों को लेकर उलझे हुए थे। एक कारीगर दुनिया की चकाचौंध की

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ମୋ ଜୀବନର ଆଦର୍ଶ (मेरे जीवन का आदर्श)

दयानंद बछा (ଦୟାନନ୍ଦ ବଛା): ଯଦିଓ ଆଜି ପଙ୍କରେ ଫୁଟିଥିବାପଦ୍ମ ଟିଏ ପରିନିଭୃତ ଅରଣ୍ୟର କଣ୍ଟାବୁଦାରେବଣ ମଲ୍ଲୀ ଟିଏ ଭଲିଫୁଟିଛି ଏଇ ଅଜ୍ଞାତ ବଣରେମହକାଇବି ଦିନେ ସାରା ଦୁନିଆକୁମୋର ସୁମଧୁର ବାସ୍ନାରେ….। ସରଳ ଜୀବନ

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