सूर्यकांत गिरि: तुम तो एक पहेली हो, मैं कैसे तुमको सुलझाऊँ।नीरव रजनी में जगने पर, मैं कैसे मन को बहलाऊँ… READ MORE
अंजू मल्होत्रा: मैं और मेरी तन्हाई,अक्सर ये बातें करते हैं,आप होते तो कैसा होता,आप ये कहते, मैं वो कहती,आप इस… READ MORE
शांभवी शर्मा : “निर्धारित दर्जे के बाहरी आवरण के नीचे हम सभी एक समान हैं और सामाजिक विभाजन दिलों को अलग… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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