संजीव कुमार : कुछ कहानियाँ अधूरी होके भी पूरी हो जाती हैं, तो कुछ कहानीयाँ पूरी होके भी अधूरी रह… READ MORE
नरेन्द्र लोहा: साथियों ज़िंदाबाद। शादी विवाह आज के समय में प्रतिस्पर्धा का बाज़ार बन चुका है और इससे बहुत सारे… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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