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ज्योति व शैलेश, बहराइच, उत्तर प्रदेश मुझे मेला देखना और मेले में छोटे-छोटे सामान खरीदना बहुत ज़्यादा पसंद है। जब… READ MORE
विश्वजीत नास्तिक: रखा गया इन्हे कुछ इसतरह कि इन्हेपता ही न चलेवे किस नरक में जी रहे हैं। सरकारी कर्मचारी,… READ MORE
विजय: साथियों, बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है। केवल लिखने से इसका हल नहीं होगा, इस पर हम… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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