दीपिका माथुर और तन्नु : बहुत याद आती है, अपने अंदर छुपी उस छोटी-सी बच्ची की,जो शायद अब मर चुकी… READ MORE
सबिता बनर्जी : दरिंदगी में पिसती बेटियां,कभी निर्भया, कभी संजली,कभी फुलन, कभी मधुमिता,ये तो वो नाम हैं जो दरिंदगी की… READ MORE
शुभम पांडेय: पिछले कुछ वर्षों में, भारत में महिला सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। अपराध की दर लगातार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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