नम्रता मिश्रा: शहरों के कई इलाकों में सुबह-सुबह कपड़ों के बड़े-बड़े ढेर दिखाई देते हैं। इन ढेरों में से इस्तेमाल… READ MORE
सुरेश राठौर: साथियों, देश ही नहीं, दुनिया भर में मज़दूरों को हमेशा से ही दोयम दर्जे का माना गया है।… READ MORE
जिनित सामाद: महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (महात्मा गाँधी नरेगा या मनरेगा) कानून, ग्रामीण श्रमिकों के लिए… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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