अंतरसिंग निगवाले: धूप से तपे पहाड़ों के बीच,मोड़दार पगडंडी पर,दो कच्चे दिलों ने एक-दूसरे को पहचाना-वह बारेला आदिवासी लड़का,और वह… READ MORE
अंतर निगवाले : बरखा आई धरती हँसी,घनघोर घटा गगन में बसी।ढोल मांदल बजे गाँव में,धरा में खेती किसानी हवाएं चलीहरिया… READ MORE
अंतरसिंग निगवाले: “भले ही स्याही के रंग से कलम चलाने वाले कलमकारों ने जिनका इतिहास गुमनाम करने का प्रयास किया,… READ MORE
अंतरसिंग निगवाले: मैं संघर्ष से नहीं डरतामैं भारत का आदिवासी हूँ।मैं प्रकृति की आंचल में रोज जीता हूँ।अपनी सांस को… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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