सलोमी एक्का: मुर्गे की बांग सुनकरभोरे उठकर सबके लिएभोजन पकाती।झटपट-झटपट घर का काम निपटाती,साग-भात टिफिन में भरकरनिकलती काम की तलाश… READ MORE
सलोमी एक्का: झारखंड में महिलाएँ अपनी समाज व्यवस्था में आज भी दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में जी रही… READ MORE
सलोमी एक्का: मैं झारखंड राज्य के रांची ज़िले के लोधमा गाँव के एक आदिवासी किसान परिवार से आती हूँ। परिवार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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