श्यामल, किरन बीर :

आज 24 अप्रैल 2025 के दिन, चांडिल बांध स्थल पर विस्थापित मुक्ति वाहिनी की बैठक हुई जिसमें झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा विस्थापितों के हक छीनने के प्रयास का कड़ा विरोध किया गया। चांडिल बांध में नौका विहार का संचालन अधिकार विस्थापितों की सहकारी समिति के बजाय गिरिडीह की एक निजी एजेंसी को सौंप दिया गया है, जो पुनर्वास नीति 2012 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। इस नीति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है – जलाशय क्षेत्र के मत्स्य उद्योग एवं पर्यटन उद्योग संबंधी संभावनाओं के दोहन में भी विस्थापितों को संबद्ध किया जाएगा तथा जलाशय में मत्स्य पालन हेतु नवसृजित जलधार की बंदोबस्ती विस्थापितों के समूहों के साथ करी जाएगी, जिससे विस्थापित परिवारों के आर्थिक पुनर्वास से इस परिसंपत्ति को संबद्ध किया जा सके। 

ज्ञात हो कि अथक संघर्ष के बाद बिहार एवं बाद में झारखंड सरकार ने पुनर्वास नीति घोषित कर विस्थापितों के हक को सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में सबसे पहले 1990 में पहले पुनर्वास नीति बनी जिसे 2003 और 2012 में संशोधित कर बेहतर पुनर्वास पैकेज उपलब्ध कराए गए हैं। 

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विस्थापितों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार के उल्लंघन का सड़क से लेकर न्यायालय तक प्रतिवाद किया जाएगा। जोयदा शहीद दिवस के अवसर पर आगामी 30 अप्रैल को शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात अधिकारियों को विस्थापितों एवं चांडिल क्षेत्र की जनता के अन्य मांगों से अवगत कराया जाएगा ताकि उसका समुचित समाधान हो सके। चांडिल क्षेत्र में न तो वन अधिकार कानून, 2006 का सही तरीके से अमल किया जा रहा है और न ही हाथियों द्वारा किए जा रहे उत्पात को वन विभाग रोकने में सक्षम है। जनता दहशत में जीने को विवश है। 

इस क्षेत्र को औद्योगिक हब बनाने की कोशिश चल रही थी और अब यह प्रदूषण हब बन कर रह गया है। कंपनियों के प्रदूषण ने तो जीवन को नर्क बना दिया है। विस्थापितों की दुर्गति की गाथा का तो अंत ही नहीं है। विगत दो वर्षों से सारे पुनर्वास कार्य ठप पड़े हैं। आवासीय भूखंडों का न तो मालिकाना दिया गया है और न ही पुनर्वास स्थलों का सीमांकन कार्य पूरा हुआ है। लिफ्ट इरीगेशन द्वारा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के बारे में तो किसी को चिंता ही नहीं है।

बैठक में शामिल सभी साथी चांडिल बांध से विस्थापित परिवारों के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं व विस्थापित मुक्ति वाहिनी से जुड़े हैं।

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