जागृति सोनकर :

मैं दिलकुशा की रहने वाली हूँ। मेरे परिवार में आठ लोग रहते हैं। मेरे पापा पेंटिंग करने का काम करते हैं। मैं हमेशा उनको दूसरों के घर धूप में पेंट करते हुए देखी हूँ। मुझे लगता है की पुताई का काम करना बहुत ही कठिन काम है। क्योंकि मेरे पापा बड़ी-बड़ी दीवार को पेंट करने के लिए बहुत ऊंचाई पर चढ़कर पेंट करते हैं।  जिसमें गिरने का भी बहुत डर रहता है। मैं जब उनको इस तरह काम करते हुए देखती हूँ तो बहुत डर लगता है। इसके साथ मेरे पापा कड़ी धूप में काम करते हैं और किसी भी दिन बाद छुट्टी नहीं लेते हैं। इस काम को करने में मेरे पापा को बहुत दिक्कत आती है जैसे एक बार वह बता रहे थे हम लोगों को जहां पर वह पुताई करने गए थे। उसे घर में पूरा पेंट करने के बाद कुछ दिनों में दीवारों पर सीलन आने लगी और दीवारों पर हल्की-हल्की पानी की बूंद जमने लगी। जिसके कारण जिनके घर था वह हमारे घर पर आकर बहुत ही हंगामा कर रहे थे और गाली गलौज पापा को दे रहे थे। मेरे पापा ने उस समय उनको कुछ नहीं कहा लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि उनके बगल के घर की दीवार में स्पेस होने के कारण दीवारों में सीलन आ रही है। लेकिन उस आदमी ने मेरे पापा की एक बात नहीं मानी और जबरदस्ती पैसा वापस करने की बात कर रहा था। बहुत झगड़े के बाद वह आदमी अपने घर लौट गया लेकिन मोहल्ले में मेरे पापा कि इस तरह बेज्जती से सभी लोग उन पर हंस रहे थे। इस तरह की दिक्कत कई बार उनको झेलनी पड़ती है हम लोग अपने पापा के साथ कभी घूमने भी नहीं जा पाए क्योंकि वह देर शाम काम करके आते हैं। तेज धूप में काम करने के कारण उनकी कमर में बहुत दर्द होता है। मैं हमेशा अपने पापा से इस काम को छोड़कर कोई दूसरा काम करने को कहती हूँ लेकिन उन्होंने इस काम को शुरू से किया है। वह इस काम को बदलना नहीं चाहते हैं। इस काम को करने के लिए कई बार मेरे पापा शहर से दूर भी जाते हैं। जिससे वह थोड़ा ज्यादा पैसा कमा सके। लेकिन अभी हमारे घर की स्थिति उतनी सही नहीं है। 

मैं दिलकुश की रहने वाली हूँ मेरे परिवार में 5 सदस्य हैं। मेरे पापा मछली बनाकर बेचने का काम करते हैं। जिसको वह मुहाबरा बाजार के पास काफी दूर एक ढाबे के पास अपना ठेला लगाते हैं। यह कारोबार सुनने में ही आसान लगता है असली चुनौती तो जिसे यह करना पड़ता है वही जानता है। मेरे पापा को इस काम के चलते बहुत ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है वह रोज सुबह जल्दी उठते हैं। रोज सामान जैसे तेल मसाला मछली यह सब लेने चिलचिलाती धूप में जाते हैं और इन सब बनी सामग्रियों को किसी दूसरी जगह पर बेचने जाते हैं। इस काम में हफ्ते में एक दिन मंगलवार को हमारी दुकान बंद रहती है और तो और यहां अयोध्या में रहने की वजह से किसी भी धार्मिक दिन में भी पापा को दुकान बंद करनी पड़ती है। नवरात्र में 9 दिन और सावन में 1 से 2 महीना दुकान बंद होती है जिसके चलते उन महीनों में आर्थिक स्थिति हमारे परिवार की सही नहीं होती। इस काम में मेरे पापा बहुत गर्मी में भट्टी के सामने काम करते हैं। जिससे उनकी तबीयत खराब हो जाती है और सबसे बड़ी मुसीबत तो अब यह है की अयोध्या से हमारी दुकान हटने वाली है। अब यह दुकान कहां लगेगी। इसके बारे में किसी को मालूम भी नहीं है। 

मेरे घर में मैं मम्मी और एक छोटे भाई बहन हैं हमारे घर में कुल चार लोग रहते हैं। मेरा घर गुलाबबाड़ी गेट के बिल्कुल बगल में है। मेरा घर टीन और पन्नी से बना हुआ है। मैं जब काफी छोटी थी तब मेरे पापा की मृत्यु हो  गई थी। जिस कारण से हमारी सारी जिम्मेदारी हमारे मम्मी के ऊपर आ गई। मेरी मम्मी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है। जिस वजह से वह घर का खर्च चलाने के लिए घर-घर साफ सफाई और खाना बनाने का काम करती हैं। इस काम को करने में जो पैसे मिलते हैं। उस पैसे से हम तीन भाई बहन पढ़ाई कर रहे हैं। घरेलू काम करने में मेरी मम्मी को कई तकलीफों का सामना करना पड़ता है सबसे पहले तो मेरी मम्मी को अस्थमा की बीमारी है। जिस कारण से उन्हें दो से तीन टाइम की दवा खानी पड़ती है अस्थमा के कारण से उन्हें ठंडी में बहुत दिक्कत होती है। मम्मी घरेलू काम में झाड़ू बर्तन जैसे काम करती हैं। लेकिन कई बार उन घरों में भारी और ज्यादा बल वाले काम करवाए जाते हैं। जिससे मेरी मम्मी की सांस फूलने लगती है। इसके बावजूद वह उनको आराम करने को नहीं कहते हैं। ज्यादा ठंडी में घर घर की सफाई में उनका दम फूलने लगता है और धूल मिट्टी के कारण वह जब काम से लौटी हैं तो पूरी रात उनको सांस लेने में तकलीफ होती है। इन सब के बावजूद कम पैसे में वह हमें पढ़ाती हैं और घर का पूरा खर्चा उठती हैं। इस काम को करने के लिए मेरी मम्मी सुबह 4:00 बजे घर से निकलती हैं और लगभग तीन घरों में झाड़ू बर्तन और खाना बनाने का काम करती हैं। ज्यादा काम न कर पाने की वजह से मेरी मम्मी को सैलरी बहुत कम ₹4000 महीना मिलता है। जिसके कारण हमारे परिवार पर हमेशा छोटे-मोटे कर्ज रहते हैं।

मेरे घर में मेरी मम्मी मेरी बहन और मेरी दादी रहती है। मेरे पापा एक ठेकेदार थे। जब उनका देहांत हुआ तो उनका बिजनेस मेरे चाचा को मिल गया। जिसकी वजह से मेरी मम्मी हम लोग का खर्च चलाने के लिए दूसरों के घर में काम करती हैं। जिससे वह हमारी ज़रूरतें पूरी करती है और घर का राशन भी लाती है। हमारे पढ़ने लिखने हर एक चीज की जरूर को वह पूरा करती हैं। इतनी ज्यादा गर्मी में वह काम करके पैसा कमाती है। जिससे हम लोगों की ज़रूरतें पूरी हो सके। मैंने उनको देखा है, उनके हाथ भी जल गए थे। पर उन्होंने किसी को भी नहीं बताया और वह हमारी जरूरत को पूरा करने के लिए अपनी मेहनत में लगी रहती है। यह सब देखकर हम लोगों को भी बहुत बुरा लगता है।

मेरी मम्मी कहीं घूमने भी नहीं जाती क्योंकि वह छुट्टी नहीं ले पाती है। उनके काम वाले भी छुट्टी नहीं देते हैं और अगर वह छुट्टी लेती भी हैं तो उनके पैसों को काट लिया जाता है। इसलिए वह छुट्टी नहीं करती है। मेरी मम्मी दूसरों के घर पर खाना बनाती है। जिससे उनकी सैलरी ₹5000 मिलती है और उसी से हमारे घर का खर्च चलता है। इतनी गर्मी में गैस के पास खड़े होकर खाना बनाना बहुत ही मुश्किल होता है। जिससे उनको चक्कर भी आता है। पर वह तब भी हम लोग की जरूरत के लिए अपना सारा सारा वक़्त उसी में लगा देती हैं। मेरा छोटा भाई है लेकिन अभी वह कोई काम नहीं करता है जिसकी वजह से अभी सिर्फ घर में कमाने के लिए मेरी मम्मी ही है। मेरी मम्मी को बहुत दिक्कत होती है यह काम करने में पर हम लोगों को भी बुरा लगता है पर घर में कोई कमाने वाला ना होने की वजह से उनको यह काम करना पड़ता है। मैं पूरी कोशिश करूंगी की बड़ी होकर अपनी मम्मी को वह सारी खुशियां दे पाऊं, जो उसको अभी नहीं मिल पा रही हैं। 

कहानियां का संकलन प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र पर जागृति द्वारा किया गया हैं।

फीचर्ड फोटो आभार – यूएन वुमेन.ओआरजी

Author

  • जागृति, दिलकुशा फैज़ाबाद की रहने वाली हैं और 5 सालों से समुदाय में शिक्षिका के रूप में काम कर रही हैं। जागृति उन किशोरियों को पढ़ाने का काम करती हैं जो कई कारणों से स्कूल नहीं जा पाती या जिन को स्कूल छोड़ना पड़ता है। वे महिलाओं के कानूनी हक-अधिकारों को लेकर फैज़ाबाद के 10 समुदायों में अवध पीपुल्स फोरम के साथ काम करती हैं। जागृति ने एन.टी.टी किया है और संविधान मित्र मंडली के समूह का संचालन करती है। इनके साथ 500 किशोरियाँ जुड़ी है जो अपनी ज़िंदगी को शिक्षा के माध्यम से बेहतर कर रही है।

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