सुरेश राठौर :

बनारस के जलालपुर गाँव कि ज्योती ने 8वीं तक शिक्षा प्रपट की है। उसके पिता का नाम हामुनाथ और माता का नाम पार्वती है। ज्योति, समता किशोरी युवा मंच से लगभग 3 साल से जुड़ी हुई है। ज्योति की शादी करीब 17 साल की उम्र में 25 साल के एक लड़के के साथ हुई। इस शादी के लिए वह तैयार नहीं थी। पर घर कि स्थिति देखते हुए वह शादी के लिए तैयार हो गई और उस लड़के के साथ उसकी शादी हो गई। शादी के दो-तीन दिन बाद ही, उसे लड़के का रवैया ठीक न लगा और वह नशा भी करता था। ज्योती ने बड़ी हिम्मत कर, अपने घरवालों को बताया, लेकिन घर वाले उसे ही समझाने लगे कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा, थोड़ा समय दो। 

कहीं न कहीं ज्योति जानती थी कि शादी में इतना पैसा खर्च हुआ था कि घर वाले भी कुछ बोल नहीं रहे थे। और दोबारा शादी करने में परेशानी होगी। फिर वह सोचने लगी कि अगर वो चुप बैठी रही तो उसकी पढ़ाई व समता किशोरी युवा मंच की मीटिंग की बातों को समझने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उसने मन-ही-मन हिम्मत बाँधी और वो अपने ससुराल से वापस आ गई। ज्योति ने अपने रिश्ते को भी वहीं ख़तम कर दिया। वापिस आना सहज तो नहीं था, पर उसके माता-पिता ने उसका साथ दिया और उसके निर्णय में उसके साथ खड़े रहे।

नरेगा मज़दूर यूनियन संगठन द्वारा जलालपुर ग्राम में खोले गये सिलाई सेंटर पर ज्योति ने धीरे-धीरे सिलाई-कढाई सीखी। प्राप्त कौशल से अब वे कुछ काम करना शुरू की है और साथ ही घर का खर्च चला रही है। 

ज्योति के साहस भरे कदम और निजी जीवन के संघर्ष में उसको संगठन द्वारा समझाई गई बातों व संगठन की अलग-अलग मीटिंग में शामिल होने से एक गहरा प्रभाव रहा है, जो निश्चित ही आगे भी उसे अपने निर्णय लेने में सहयोग करेगा।

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  • सुरेश राठौर / Suresh Rathaur

    सुरेश राठौर बनारस, उत्तर प्रदेश में रहते है और नरेगा के अंतर्गत महिला मज़दूरों के मुद्दों पर काम करते है ।

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