कलादास:

क्या आप बस्तर को जानते हैं?
घने वनों से आच्छादित
खनिज संपदा का भण्डार
अपने अंदर समेटे हुए
आपार खनिज संपदा
आधुनिक चकाचौँध से
बहुत दूर…
आदिवासी रहते हैं
क्या उन्हें पहचानते हैं?
नहीं न?
आपको को तो बस
यही बताया जाता है
बस्तर मतलब खुँखार….
पर दशकों से चल रहा
जन संहार….
टी.वी. में, अखबारों में,
बस यही बताया जाता है
क्या उसे तुम मानते हो?
हाँ या नहीं ?
वही बस्तर के आदिवासी,
जो जल जंगल ज़मीन को
बचा कर रखे हैं
यही आवाज़ को लेकर
अलग-अलग गाँवों में
संघर्ष में डटे हैं
क्या तुम्हें पता है?
जंगल मे तेंदु पत्ता तोड़ने गए
आदिवासीयों को
मुठभेड़ का नाम देकर
मार डाला गया।
क्या तुम मारने वालों को जानते हो?
क्या उनको अच्छे से नहीं पहचानते हो?
आप जानते भी हो
पहचानते भी हो
फिर भी आप बताना नहीं चाहते
आप सब कुछ जानते है!
बस्तर मे चल रहे जनसंहार का
गवाह है-
चिल्लाती चिड़िया, नदी, नाले, झरने
बिलखती मासूम की चीख
पिता और माँ का फूट-फूट कर रोना
गाँव में रोने की आवाज़
गाँव उजड़ने के बाद का सन्नाटा
खून के धार
बेबस लाचार
निर्दोष आदिवासी का मारा जाना
कीड़ों की तरह
और तुम चुपचाप
मंजर देख रहे हो
ये तुम्हारा चुप रहना
बर्दाश्त नहीं
क्यूंकि तुम्हारी चुप्पी
जनसंहार करने का मौका दे रही है
क्या ये बात तुम मानते हो?
अगर ज़िन्दा हो तो खड़े हो
वरना मुर्दे की तरह पड़े रहो…

फीचर्ड फोटो आभार Dainik Bhaskar

Author

  • जन कवि कलादास डेहरिया छत्तिसगढ़ मुक्ति मोर्चा मज़दूर कार्यकर्ता समिति से जुड़े हैं और रेला नामक एक सांस्कृतिक मंच के द्वारा मज़दूरों, किसानों और आदिवासियों के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चेतना के लिए लगातार काम करते हैं।

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