मनीषा शहारे:

लिव इन रिलेशनशिप यह संकल्पना पाश्चिमात्य देशों में बहुत पहले से चल रही है। यह रिश्ते विदेशों में बहुत प्रचलित और आम हो चुके हैं। पाश्चिमात्य रापद्र की संस्कृति का प्रभाव धीरे-धीरे भारत देश पर होता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद यह लिव इन रिलेशनशिप वाली संकल्पना भी वहीं से अपने भारत देश पर दिखाई दे रही है। आम तौर पर विदेशों में यह एक आम बात है, लेकिन आज भी भारत देश में यह भारत के संस्कृति के खिलाफ मानी जाती है। हालाँकि कानून लागू किये गए हैं, फिर भी भारत एक संस्कृति को महत्व देने वाला देश है। लोगों की धार्मिक श्रद्धाएं आज भी इस देश में दिखाई देती हैं और इस तरह की रिलेशनशिप उनकी मान्यता नहीं देती क्यूंकि भारत में आज भी लोग पारंपरिक एवं रीति – रिवाज़ द्वारा विवाह को मान्यता देते हैं। इसकी वजह से लिव इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दे से आज भी लोग उतने रुबरु नहीं हो पा रहे हैं।

बड़े-बड़े विकसित शहरों के युवाओं के लिए यह आम बात है। भारत में भी जो लोग बड़े शहरों में नौकरी कर रहे हैं, वह इस रिलेशनशिप में रहना ज्यादा पंसद कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि बिना शादी के यह चिज मिल रही है इसमें कोई ज़बरदस्ती रिश्ते निभाने नहीं पड़ते हैं, और ना ही किसी रिश्ते का बोझ उठाना पड़ता है। बस अपने जैसे किसी व्यक्ति के साथ रहेते हैं और किसी चीज की कोई टेंशन नहीं रहती है। यह आज के युवाओं की मानसिकता बन चुकी है, इसलिए वह इस रिलेशनशिप को बढ़ावा दे रहे हैं।

लाइव ला की एक रिपोर्ट के मुताबिक चार दशक पहले 1978 में बद्री प्रसाद बनाम डायरेक्टर ऑफ फसोलिडेसन के केस में सुप्रीम कोर्ट का यह मानना था की जो लोग लंबे समय से साथ में रहते हैं उनके लिए कानून की निर्मिती की गई है। क्योंकि इससे उस रिश्ते में रहनेवाले दोनों को संरक्षण प्राप्त हो सके और वह सुरक्षित रहें। आज के समय में देखा जाए तो यह एक अच्छी बात भी है और बुरी भी। जो जिस तरह से सोचता है, उसकी मानसिकता उसको उसी तरह की बातें  समझाती हैं। इस रिलेशनशिप में रहकर बहुत लोग खुश भी हैं, और कुछ लोग दुखी भी हैं। इस रिलेशन को कुछ लोग फैशन के तौर पर भी समझते हैं, क्योंकि इसमें कोई बंधन नहीं रहता। लेकिन उन दोनों युवाओं ने अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए एक रिश्ते को संभालकर रखना भी बहुत ज़रुरी होता है। इसमें अभी जो नियम कानून बनाये गए हैं उसकी जानकारी रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है, जो लिव-इन रिलेशनशिप में हैं।

महीला अत्याचार कायदा, घरेलू हिंसा से सुरक्षा अधिनियम, 2005 जैसे कानून इस रिलेशन में रहने वाली लड़की के लिए लागू किए गए हैं।महिलाओं पर कोई समस्या आये तो वह कानूनी रुप से न्याय मांग सकती है। पर इस बात का कईं महिलाएं गलत फायदा भी उठाती हैं। इस रिलेशन में शादी के तरह दो व्यक्ति एक-दूसरे की सहमती से साथ रहते हैं, शारीरीक संबंध भी प्रात्यक्षीत कर सकते हैं। लेकिन दिन-प्रतिदिन यह रिलेशन लोगों के लिए आम और फैशन जैसा बन चूका है। इसकी वजह से एक से ज्यादा अगर कोई समस्या निर्माण होने लगे तो एक पार्टनर यह रिलेशन को छोड़ सकता है। इस तरह वह दूसरे व्यक्ति के संबंध में आ सकता है। ऐसे रिश्तों से की वजह से आरोग्य की स्थिति पर विपरीत परीणाम हो सकते हैं, जहाँ HIV जैसी बीमारियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए आज के युवाओं को लिव-इन रिलेशनशिप में आने से पहले ही अपने दूसरे पार्टनर के प्रती एकनिष्ठ भावना रखनी चाहिए तभी यह रिलेशन अच्छे रह सकते हैं।

शादी से बचने के लिए इस रिलेशनशिप में लोग आना चाहते हैं, लेकिन यह रिलेशन भी शादी की तरह निभाना है, पर पारंपरिक रीति-रिवाज़ से विवाह नहीं है। पर दोनों को एक-दूसरे को साथ लेकर चलना पड़ता है। पाश्चिमात्य देशों की संकल्पना में मशहूर लिव-इन रिलेशनशिप, भारत में भी प्रचलित हो रही है। पर याद रहे हर व्यक्ति जो इस रिलेशनशिप में है या रहना चाहते हैं, उसे सामाजिक स्थीती को समझकर और खुद की सोच, सभी चिजो को अच्छे से समझ कर निर्णय लेना ज़रुरी है, तभी यह रिलेशन ज़्यादा समय तक और अच्छे से चलेगा।

Author

  • मनीषा, महाराष्ट्र के गोंदिया ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। वह कष्टकारी जन आन्दोलन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रही हैं।

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