कमलचंद किस्पोट्टा:

हाल ही में संपन्न 16 वें विश्व सामाजिक मंच (डब्ल्यूएसएफ) 2024 नेपाल की राजधानी काठमांडू में फरवरी 15 से 19, 2024 में आयोजन किया गया। इसकी शानदार शुरुआत 15 फरवरी को लगभग 3 किलोमीटर की “एकता मार्च” के साथ हुयी। इस रैली का आकार काफी विशाल था। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आये लोग एक साथ चल रहे थे, ज्यादातर पारंपरिक वस्त्र में, कुछ प्राकृतिक वस्त्र में, कुछ कामकाज में, कुछ साधारण और कुछ सूट में, “एक और दुनिया संभव है” के उच्चारण के साथ हाथ में हाथ चल रहे थे। यहाँ श्रमिक, किसान, व्यापार संघ, महिला संगठन, एलजीबीटीक्यूआई संगठन, प्राकृतिक जनजाति संगठन, नृवाचन संगठन, नागरिक समाज संगठन और विश्वभर से सामाजिक आंदोलन भी शामिल थे।

ज्ञात हो कि डब्ल्यूएसएफ की उत्पत्ति वैश्विकरण के खिलाफ विश्व के सामाजिक आंदोलनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता से हुई थी जो 2001 में ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे में हुआ था। डब्ल्यूएसएफ 2024 की प्रक्रिया नवंबर 2022 में ही शुरू हुई, जब नेपाल को 16वा डब्ल्यूएसएफ 2024 आयोजित करने के लिए एक मेज़बान देश के रूप में चुना गया। चयन प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय परिषद (आईसी) और एशिया-प्रशांत सामाजिक मंच (एपीएसएफ) ने आयोजित किया था।

उसके बाद, नेपाल संगठन समिति (एनओसी) ने सावधानीपूर्वक योजना बनाई। डब्ल्यूएसएफ 2024 वेबसाइट का शुभारंभ हुआ। भृकुटि मंडप को डब्ल्यूएसएफ 2024 के मुख्य स्थान के रूप में चुना गया। 15 फरवरी को उद्घाटन समारोह में भृकुटि मंडप विश्वभर के प्रतिभागियों से खाचाखच भरा हुआ था, जहाँ से लोगों के दिलों में आशा, प्रेरणा और एकता का हुँकार भरा गया।

डब्ल्यूएसएफ 2024 में 50,000 से अधिक प्रतिभागी थे, जिनमें छः महाद्वीपों और 98 देशों के 1400 संगठन शामिल थे। अंतरमहाद्वीपीय युवा मंच का संचालन 30 से अधिक देशों के 410 प्रतिभागियों के द्वारा किया गया। कई विषयों के तहत 400 से अधिक गतिविधियां चलायी गई, जिसमें अर्थशास्त्र, प्रवास, भेदभाव, जेंडर, संस्कृति, युद्ध और शांति, जलवायु परिवर्तन, आदिवासी समूह, मानव अधिकार, सामाजिक आंदोलन आदि शामिल थे। 19 फरवरी आखरी दिन दुनियाभर की संगठनों के द्वारा 60 से अधिक घोषणाएँ बनाई गयीं, जो पुनः “एक और नई, न्यायमय दुनिया संभव है” जैसी सपना को साकार करने की ओर काम करने के संकल्प को मजबूती देता है।

विश्व सामाजिक मंच (डब्ल्यूएसएफ) 2024 यह मानता है कि विश्व भर में यूरोपीय संघ, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका, नाटो, विश्व आर्थिक मंच और अन्य सहित महाशक्तियों और बाजार उन्मुख अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने दुनिया को बढ़ती प्रतिस्पर्धा, घृणास्पद भाषण और खूनी युद्धों, जातीय भेदभाव जैसे समुद्र में धकेल दिया है। फ़िलिस्तीन का नरसंहार, परमाणु युद्ध का ख़तरा, आर्थिक और पारिस्थितिक आपदाएँ, और बढ़ती सत्तावादी सरकारों द्वारा समर्थित नव-उपनिवेशवादी अन्याय हो रहें हैं।

विश्व की बहुसंख्यक आबादी विभिन्न तरीकों से इन विनाशकारी नीतियों के परिणाम भुगत रही है। सामाजिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हो रहा है । समाज में महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है। असमानता अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ रही है। भोजन की कमी और अकाल बढ़ता जा रहा है और समाज टुकड़ों में बांटा जा रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित मानवाधिकारों के दमन के कारण लोकतंत्र खोखला होता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग, जैविक विविधता की हानि, पानी की कमी और अन्य पर्यावरणीय विनाशकारी प्रक्रियाएँ हम सभी को प्रभावित करती रहीं हैं।

विश्व सामाजिक मंच महाशक्तियों, वैश्विक कॉरपोरेट्स और सत्तावादी सरकारों की सामंतवादी और नव-उपनिवेशवादी महत्वाकांक्षाओं का शांतिपूर्ण तरीकों से मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। तथा यह प्रस्ताव भी पारित करती है:-

1.  गाज़ा में जनसंहार और जातीय शुद्धिकरण को बंद करें, और तत्काल युद्धविराम करें।
2. दुनिया में हो रहे सभी युद्धों को तत्काल बंद करें।
3. तानाशाही संघ, हैती में लोगों के संघर्ष को सलाम करते हुए शांति बहाल करे।
4. सामाजिक और जलवायु न्याय के लिए निरस्त्रीकरण को बढ़ावा दे।
5.  साम्राज्यवादी देशों की अराजकता फ़ैलाने वाली योजनाओं की निंदा करते हुए हैती में शांति बहाल करे।
6. विश्व में सामाजिक और जलवायु न्याय के लिए निरस्त्रीकरण को बढ़ावा दें।
7. जुलाई में अमेरिका में होने वाले नेटो 75 वर्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदर्शन करते हुए शांति और जलवायु न्याय के लिए एक कार्रवाई दिवस का आह्वान करें।
8. सामाजिक आंदोलनों और राजनीतिक दलों के समर्थन से दक्षिणपंथी उग्रवाद और फासीवाद के खिलाफ पोर्टो एलेग्रे से विश्वव्यापी अभियान चले।
9. नेपाल में आयोजित डब्ल्यूएसएफ में प्रस्तावित जलवायु न्याय और विशेष रूप से सामाजिक अधिकारों, ग्रामीण, पानी और ग्लेशियर पिघलने के मुद्दों को मिलकर संबोधित करने पर किए गए आह्वान का समर्थन करें।
10. फिलिस्तीन की महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाते हुए पूरी दुनिया में 8M (8 मार्च महिला दिवस – मेरे अधिकार, हमारी शक्ति: महिलाओं के मौलिक मानवाधिकारों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए फिलिस्तीन में एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया) को बढ़ावा देना।

फीचर्ड फोटो आभार – वर्ल्ड सोशल फोरम

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  • कमलचंद झारखण्ड के परेवा गाँव से है और पिछले 20 सालो से सामाजिक कार्य कर रहे है। वर्तमान में वह दिल्ली में रहकर श्रुति संस्था के साथ जुड़कर काम कर रहे है ।

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