विकास कुमार:

भारत के संविधान को बने 74 वर्ष हो गए हैं। 26 नवंबर 1949 को देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को अपनाया था और 26 जनवरी 1950 को देशभर में इस संविधान को लागू किया गया था। भारत एक लोकतंत्रिक गणराज्य बना। संविधान भारतीय समाज के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है जो स्वतंत्रता, समता, बंधुता, न्याय, विधि का शासन, विधि के समक्ष समानता, लोकतंत्रिक प्रक्रिया, और धर्म, जाति, लिंग और अन्य किसी भेदभाव के बिना सभी व्यक्तियों के लिए गरिमामय जीवन का आदर्श प्रस्तुत करता है।लेकिन आजाद भारत के समय की तरह ही आज भी संविधान द्वारा स्थापित समाज का आदर्श और वास्तविकता दोनों ही उलट नजर आती है। आर्थिक असमानता की बढ़ती खाई और समाज में व्यक्तियों और विभिन्न समुदायों के बीच बढ़ता अलगाव इस विरोधाभाषा को सामने लेकर आता है। टेक्नोलॉजी की तेज प्रगति ने भी सामाजिक तनाव-बाने और व्यक्तिगत व्यवहार में व्यापक बदलाव लाए हैं। समाज में लोगों में महत्वकंशा और आत्म-केंद्रित व्यवहार देखा जा रहा है जिसके कारण उदार और मानवीय मूल्यों की कमी हो रही है। उनमें आक्रमणकारिता, असहमति, बहिष्कार की प्रवृत्ति, तर्कहीन दृष्टिकोण की कमी देखी जा सकती है। समाज की इन चुनौतियों के बीच संविधान अब भी एक आइन है जो हमें बेहतर मानव और समतामूलक समाज बनाने का रास्ता दिखाता है।

संविधान के महत्व, इतिहास और विशेषताओं को जन-जन तक पहुँचाने एवं संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को लेकर जागरूक करने के उद्देश्य से 21 से 26 नवंबर तक कोल्हान, झारखंड में छह दिनों का संविधान यात्रा अभियान का आयोजन किया गया है। संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक सोच के प्रसार के लिए झारखंड में दो ज़िले, पूर्वी सिंहभूम और सराइकेला खरसावां के विभिन्न स्कूल, कॉलेज, और समुदाय में इस संविधान संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उल्लेखनीय है कि समाज में वैज्ञानिक मानसिकता के विकास को भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों की सूची में शामिल किया गया है। इस कारण हमने यात्रा के दौरान समाज में विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर भी बल दिया ताकि लोग वैज्ञानिक पद्दति को अपनाएं। हर चीज़ पर सवाल करना सीखें और दुनिया को देखने और समझने का नया दृष्टिकोण भी उनमें विकसित हो। 

आरंभ युवा मंच, जमशेदपुर और द टिस्को टेक्निकल प्रोबेटिशनर्स एसोसिएशन की अगुआई में निकाली गई इस यात्रा में सहयोगी की भूमिका में थे – भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), सांइस फॉर सोसायटी झारखंड, गांधी शांति प्रतिष्ठान। 21 नवंबर को पोटका क्षेत्र के हेंसलबिल पंचायत अंतर्गत बड़ा सिगदी गाँव स्थित पर्यावरण चेतना केन्द्र के सहयोग से संविधान यात्रा की शुरूआत की गई। दुसरे दिन हमने पटमदा में पटमदा इंटर कॉलेज जल्ला में दिन भर का कार्यक्रम किया। तीसरे दिन यात्रा सराइकेला खरसावां ज़िले के गम्हरिया में स्थित अरका जैन यूनिवर्सिटी पहुँची, चौथे दिन गम्हरिया के XITE कॉलेज में कार्यक्रम हुआ, जहाँ ख़ास तौर पर वरिष्ठ पत्रकार व प्रतिष्ठित स्थानीय हिन्दी दैनिक के संपादक संजय मिश्रा की उपस्थिति रही। 25 नवम्बर को काशी साहू कॉलेज, सरायकेला में यात्रा के पहुँचने पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कोल्हान विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. राजेन्द्र भारती मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। संविधान यात्रा 2023 का समापन 26 नवंबर संविधान दिवस के दिन जमशेदपुर में टाटा स्टील द्वारा आयोजित जैम स्ट्रीट के दौरान हज़ारों की संख्या में जुटे लोगों में संविधान के प्रति अभिरुचि जगाने के अपने प्रयासों के साथ हुआ। 

“यात्रा के दौरान हमने समुदाय, स्कूल और कॉलेज, और सड़क पर भी विभिन्न गतिविधियां की। इस दौरान हम बढ़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, और आम लोगों के साथ संवाद कर पाये। हमने शुरू से ही निर्णय किया था कि यह यात्रा दो-तरफा संवाद पर केंद्रित होगी। लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की पूरी आज़ादी होगी और हम उनके विचारों का सम्मान करेंगे और किसी निर्णय और निष्कर्ष से बचेंगे। लोगों को जागरूक करने और उनसे संवाद करने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इसमें घुमंतू पुस्तकालय, मोबाइल सिनेमा, पोस्टर प्रदर्शनी, संवैधानिक संवाद सत्र आदि शामिल थे।”

मोबाइल और इंटरनेट के युग में किताब पढ़ने की रूचि में लगातार कमी देखी जा रही है। पढ़ने के आभाव में लोग गलत सूचनाएं ग्रहण करते हैं, उनका व्यापक दृष्टिकोण भी नहीं बन पाता। इस कारण हमने विभिन्न विषयों पर किताबों की प्रदर्शनी की। बुक स्टॉल पर संविधान और कानून, विज्ञान पुस्तकें, बच्चों से जुड़ी, महान व्यक्तियों की जीवनी से जुड़ी किताबें थीं। लोगों ने स्टॉल पर लगी विभिन्न पुस्तकों को देखा और अध्ययन किया। कई छात्रों ने हमारी लाइब्रेरी से भी जुड़ने की रूचि जाहिर की।

यात्रा में पोस्टर प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। संविधान बनने के इतिहास की रोचक जानकारियां देने कुछ दुर्लभ पोस्टर्स का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार, लैंगिक असमानता, पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत अधिकार को लेकर भी कुछ पोस्टर्स लगाए गए। यूनिवर्स और मानव की उत्पत्ति को लेकर कई धार्मिक कहानियों और मान्यताओं से लोग भले ही अवगत हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध पर आधारित जानकारियां जानकारियाँ कम ही लोगों के पास होती हैं। इस कारण विज्ञान विषयों पर भी हमने पोस्टर्स लगाए जिनमें यूनिवर्स, सौर मंडल और जीव की उत्पत्ति खासकर मानव विकास क्रम का चित्रण किया गया है। हमने पोस्टर प्रदर्शनी देख रहे छात्रों और लोगों से निरंतर संवाद भी किया। हमने पाया कि इन विषयों के लिए वे जरुरी उत्सुक दिखे लेकिन इससे जुड़ी जानकारी काफी सिमित थी। विज्ञान विषयों की पढ़ाई स्कूलों में जरूरी होती है, लेकिन गुणवत्ता की कमी है। हमें महसूस हुआ कि सरल और मनोरंजक भाषा में इस विषयों पर संवाद किया जाए तो उनमें वैज्ञानिक चेतना का विकास होगा।”

“फिल्में एक ऐसा सशक्त माध्यम हैं जिससे हम लोगों को शिक्षित कर सकते हैं। जो काम भाषण नहीं कर सकता, वह काम छोटी सी फिल्म कर देती है। फिल्में लोगों के मस्तिष्क पर लम्बे समय तक अपना प्रभाव छोड़ती हैं। इस कारण हमने यात्रा के दौरान फिल्मों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया। भारत के संविधान बनने की प्रक्रिया और हमारे मौलिक अधिकारों से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन किया। जेंडर, जाति विषमता, सांप्रदायिक सद्भावना, आर्थिक असमानता पर केंद्रित लघु फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, म्यूजिक वीडियो, एड फिल्मों को दिखाया। हर फिल्म के प्रदर्शन के बाद हमने लोगों से फिल्म से मिली नई जानकारी और सिख पर बातचीत की। ग्रामीण इलाकों में समुदाय और स्कूल में लड़कियां बात करने से संकोच कर रही थीं, दूसरी ओर कॉलेज में लड़कियां ही मुखर होकर अपनी बातें कह रही थीं। हमारी टीम ने कोशिश की कि दिखाए गए फिल्मों में लोग विभिन्न पक्षों को देख सकें, देखने-समझने का अलग-अलग नजरिया बना सकें।

संविधान के बारे में लोगों के क्या विचार हैं? इसमें क्या खूबियाँ देखते हैं? इसमें क्या कमियाँ हैं? भारत के समाज में किस तरह की समस्याएं हैं जिसमें परिवर्तन होना चाहिए? भविष्य का भारत कैसा हो? इन विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए हमने एक आकर्षक माध्यम का इस्तेमाल किया, जिसका नाम था ‘संविधान ट्री’। लोगों ने पत्तियों के आकार में कागज पर अपने विचार लिखे और पेड़ को जीवित किया। ज्यादातर लोगों ने संविधान की प्रशंसा में इससे मिले अधिकारों पर विचार लिखे। युवाओं ने देश में कई समस्याओं जैसे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, स्वास्थ्य समस्याएं, खेल-कूद पर सरकार का ध्यान नहीं जाना, रोजगार के अवसरों पर चिंता जाहिर करके इसमें सुधार करने की बातें कीं। दूसरी तरफ कुछ लोगों ने आरक्षण जैसे संवैधानिक व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की भी बातें कीं।”

“उपस्थित लोगों के साथ विशेष रूप से एक ‘संवाद सत्र’ चलाया गया, जिसमें सांविधानिक मूल्यों की चर्चा करते हुए एक नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को गहराई से समझने का प्रयास किया गया।

यात्रा के दौरान हमने संविधान की प्रस्तावना की प्रति को लोगों के बीच निशुल्क बांटा। कई जगहों पर प्रस्तावना का सामूहिक पाठ भी किया गया। ‘हम भारत के लोग’ और ‘We the people of India’ अंकित बेज भी सभी को दिए गए। लोगों ने इसे लेने में काफी उत्सुकता दिखाई। यात्रा के दौरान हमने कार्यक्रम परिसर में ख़ास तौर पर हस्ताक्षर पट भी लगाया गया, जिसमें भारत के संविधान को मानने की प्रतिज्ञा करते हुए लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए। हमने भारत के संविधान की उद्देशिका को सभी शिक्षक संस्थानों को भेट स्वरूप दिया । 

छह दिनों तक यात्रा के दौरान लोगों का भरपूर समर्थन और सहयोग मिला। इस दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं लेकिन मजबूत इरादों के कारण टीम का उत्साह कभी नहीं टूटा। कई युवा साथी इस अभियान में जुड़ने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। कोशिश रहेगी कि नए लोगों को अभियान में जोड़ा जाए और इसे व्यापक बनाया जाए। अभियान की निरंतरता से ही हम सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम आगे बढ़ा सकते हैं।

इस पूरी यात्रा को सफल बनाने में अंकुर शाश्वत, अंकित, नीलेश, शशांक शेखर, विकास कुमार ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाई। अंतिम दो दिन श्रुति, दिल्ली से आए कमल चन्द यात्रा टीम का हिस्सा बने और पूरा सहयोग दिया जिससे टीम का मनोबल काफी बढ़ा। अभियान को हर संभव मदद देने के लिए सहयोगी संगठनों/संस्थाओं और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और लोगों का भी विशेष आभार।

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  • विकास युवा विचारक, स्वतंत्र पत्रकार एवं प्रगतिशील सिनेमा आंदोलन से जुड़े हैं, झारखंड के निवासी,हैं और फिलहाल विशाखापटनम में रहते है।

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One response to “संवैधानिक मूल्यों एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने हेतु कोल्हान, झारखंड में जन अभियान ”

  1. Shashank Shekhar Avatar
    Shashank Shekhar

    अभियान के विषय में सारगर्भित एवं सम्पूर्ण व्याख्या।

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