इमाद उल रियाज़:
यह कहानी इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले दो युवाओं की है जिन्हें प्यार हो गया। प्रमोद एक ऊँची जाति के परिवार से थे, जबकि सान्वी का जन्म और पालन-पोषण निचली जाति के घर में हुआ था। उनकी जाति की स्थिति में अंतर दोनों के लिए कोई मायने नहीं रखता था और उनका बंधन मजबूत होता गया। कॉलेज खत्म होने के तुरंत बाद, सान्वी के माता-पिता ने उसके लिए एक युक्त दूल्हे की तलाश शुरू कर दी। जब हालात ऐसे हो गए कि वह उनके साथ लड़का देखने जाने का दिखावा नहीं कर सकती थी, तो उसने उन्हें प्रमोद के साथ अपने रिश्ते के बारे में बताया। इस बात को मानने से इनकार करते हुए सान्वी के माता-पिता ने अगले ही दिन प्रमोद को बुलाया और अपनी नाराज़गी साझा की। वह अचंभित हो गया, वह ऐसी किसी भी स्थिति के लिए तैयार नहीं था, उसने उन्हें आश्वासन दिया कि वह सान्वी से दोबारा संपर्क नहीं करेगा। हालाँकि, प्रमोद ने उनसे कहा कि अगर सान्वी खुद उससे संपर्क करने का कदम उठाएगी, तो वह ज़रूर जवाब देगा। सान्वी के माता-पिता यह सोचकर सहमत हुए कि उनकी बेटी उनकी इच्छाओं पर ध्यान देगी। दूसरी ओर, प्रमोद के माता-पिता कूटनीतिक थे। “जब वे हमसे संपर्क करेंगे तो हम देखेंगे…” सोचकर मामला वहीं ख़त्म हो गया।
युवा जोड़े ने चुपके से दोबारा एक दूसरे को संपर्क किया। चूंकि सान्वी के घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई थी, इसलिए वे एक-दूसरे से फोन पर बात करते रहे। दो महीने के बाद परिवार ने यह सोचकर सान्वी पर से प्रतिबंध हटा दिया कि उसे पर्याप्त रूप से दंडित कर दिया गया है। सान्वी के माता-पिता ने फिर से शादी के लिए सान्वी पर सहमति देने का दबाव बनाना शुरू किया, जब तक वह इसका कड़ा विरोध करने के लिए मजबूर नहीं हो गई। उसकी आज़ादी एक बार फिर उससे छीन ली गई और इस बार सान्वी से उसका फोन भी ले लिया गया, जो प्रमोद से संपर्क करने का उसका एकमात्र साधन था। निःसंदेह युवा जोड़े को इसकी उम्मीद थी और उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि ऐसी स्थिति में सान्वी के पास उपयोग के लिए एक और फोन हो, ताकि वे एक-दूसरे के संपर्क में बने रहें।
सान्वी के परिवार ने अब उसकी शादी तय करने के प्रयास तेज कर दिए थे और वह लड़के की तलाश के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे थे। सान्वी ने यह सब प्रमोद को बताया और दोनों ने उसके भाई के ईमेल को हैक करने का फैसला किया ताकि उसकी चैट तक पहुँचा जा सके। उन्हें सान्वी के भाई की ईमेल आईडी मालूम थी और कई प्रयास करने के बाद वे सान्वी के भाई की ईमेल का पासवर्ड क्रैक करने में कामयाब हुए। उन्होंने तीन चरणों वाली एक सरल प्रक्रिया का पालन किया। प्रमोद सबसे पहले चुने गए लड़के का टेलीफोन नंबर प्राप्त करेगा और उसे अपनी फेसबुक आईडी पर जोड़ देगा; फेसबुक के माध्यम से सान्वी उस लड़के को, उसके भाई को जवाब देने से मना करती; और, अंत में, यदि वह व्यक्ति कॉल का उत्तर नहीं देता, तो प्रमोद उससे फेसबुक पर संपर्क करता था।
यह योजना थोड़े समय के लिए काम कर गई और 2-3 लोगों ने उनके अनुरोध पर शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। लेकिन चौथे व्यक्ति ने सान्वी के पिता को फोन किया और शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार करने से पहले सान्वी के कॉल के बारे में बताया। चूँकि अब मामला काफी बिगड़ गया था तो पहला मौका मिलते ही सान्वी ने अपनी माँ को टॉयलेट में बंद कर दिया और घर से भाग गई। जब परिवार वालों की खोज का कोई नतीजा नहीं निकला, तो सान्वी के भाई ने प्रमोद को फोन किया। प्रमोद भी ये सब जानकार आश्चर्यचकित था, क्योंकि उसे खुद इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था। हालाँकि, इसके तुरंत बाद, सान्वी के एक दोस्त ने प्रमोद को फोन किया और उसे बताया कि सान्वी उसके साथ है और उससे मिलना चाहती है। उन्होंने मिलकर कुछ समय इंतज़ार करने और यह देखने का फैसला किया कि परिवार में बात आगे कैसे बढ़ेगी। दोनों अभी भी अपने परिवार की सहमति से शादी करना चाहते थे और उन्होंने एक और योजना बनाई। योजना यह थी कि प्रमोद, सान्वी के भाई से संपर्क करेगा और सान्वी को खोजने के लिए उसके साथ जाने का प्रस्ताव देगा। सान्वी को ढूँढने के दौरान सान्वी प्रमोद को फ़ोन करेगी, और यह दिखावा करेगी कि घर छोड़ने के बाद वह पहली बार फोन कर रही है। जैसे ही सान्वी ने फोन किया, उसका भाई रो पड़ा, वह अपने परिवार को उनकी शादी के लिए राजी करने को तैयार था। प्रमोद को अपने माता-पिता की चिंता नहीं थी क्योंकि उन्होंने जोड़े को ना नहीं कहा था।
सान्वी के भाई ने परिवार को सहमति देने के लिए मजबूर किया। माता-पिता ने दोनों की कुंडली मिलाने का फैसला किया, लेकिन फैसला अनुकूल नहीं आया। ज्योतिषी के अनुसार, गणना से पता चला कि पति दो या तीन महीने के भीतर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है। उन्होंने कई अन्य ज्योतिषियों से परामर्श किया। उनकी भविष्यवाणियाँ भी समान थी। इस रिश्ते से पीछे हटने का यह एक अच्छा कारण था, शायद वे सान्वी और प्रमोद को कभी एक साथ खुश नहीं देखना चाहते थे।
सान्वी के परिवार ने यह बात किसी को नहीं बताई। उन्होंने प्रमोद को जवाब ही देना बंद कर दिया। उसे नहीं पता था कि क्या हो रहा है। सान्वी को घर में कैद कर दिया गया और उसे भावनात्मक और शारीरिक रूप से पीड़ित किया गया। वे चार महीने तक एक-दूसरे के साथ संवाद नहीं कर सके, जब तक कि एक दिन सान्वी किसी तरह एक ऑनलाइन माध्यम से प्रमोद को अपनी दुर्दशा बताने में कामयाब हुई। सान्वी ने प्रमोद को सारी बातों से अवगत कराया, लेकिन आगे का रास्ता क्या होगा, यह अभी भी उन्हें स्पष्ट नहीं था। सौभाग्य से सान्वी की एक पड़ोसी उनकी दुर्दशा और एक-दूसरे के प्रति प्यार से प्रभावित होकर, मदद करने के लिए सामने आई और उन्हे हर संभव मदद देने का वादा किया। अगले चार महीनों तक वह पड़ोसी ही उनके पत्रों को एक-दूसरे तक पहुँचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाती रहीं। टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया के युग में, दो युवा व्यक्तियों ने पुराने तरीकों से एक-दूसरे तक पहुँचने का रास्ता ढूंढ लिया था।
सान्वी के लिए यह अत्यंत पीड़ा का समय था। उसे घर पर खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पिता ने उसे दोषी महसूस कराने के लिए स्वयं भी खाना बंद कर दिया। जिस चीज़ ने उसे स्वस्थ बनाए रखा, वह थी प्रमोद को लिखने की क्षमता, जहाँ वह अपने दिल की बात बता सकती थी और खुद को तनावमुक्त कर सकती थी। उसके पत्रों ने प्रमोद को कोई रास्ता/उपाय खोजने की तात्कालिकता का एहसास कराया। उसने मदद मांगने के लिए सरकारी विभागों और नागरिक समाज संगठनों को लिखा लेकिन कहीं से प्रमोद को कोई जवाब नहीं मिला। प्रमोद ने ऑनलाइन भी खोज की, प्रश्न उठाए और फिर किसी ने उन्हें एक वकील से संपर्क कराया जो उसकी मदद कर सकता था।
अदालत परिसर में जाने का प्रमोद का अनुभव भी अच्छा नहीं रहा, जो चिंतित करने वाला वाला भी था और डराने वाला भी। वकील ने विवाह के संबंध में हिंदू विवाह अधिनियम या विशेष विवाह अधिनियम जैसे विभिन्न कानूनों के बारे में जानकारी दी। विशेष विवाह अधिनियम के बारे में, अधिकांश लोगों की तरह, प्रमोद को भी कोई जानकारी नहीं थी। वकील ने मोटी फीस का हवाला भी दिया। इससे उसकी घबराहट और अविश्वास और बढ़ गया। इसी दौरान प्रमोद का परिचय धनक संस्था से हुआ। प्रमोद ने धनक को अपना पूर हाल लिखा और तुरंत ही उसे उत्तर मिला। पूरे समय धनक के साथ ईमेल और संदेशों के आदान-प्रदान से प्रमोद को सुरक्षित और निश्चित रूप से आगे बढ़ने का स्पष्ट विचार मिला।
योजना के मुताबिक सान्वी ने पत्र लिखकर कहा कि वह अपनी मर्जी से प्रमोद के साथ जाना चाहती है और उस पर किसी ने दबाव नहीं डाला है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए प्रमोद ने सान्वी के परिवार के साथ अपनी सभी बातचीत और संचार का रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने हैदराबाद में नौकरी खोजी और बिना किसी को बताए प्रमोद वहाँ चला गया। असल में उसने अपने दोस्तों, परिवार और यहाँ तक कि सान्वी को भी अपने ठिकाने के बारे में गलत जानकारी दी। प्रमोद ने एक घर किराए पर लिया और उसे सान्वी के लिए कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, सहित हर उस अंतिम चीज़ से सुसज्जित किया जिसकी एक घर में ज़रूरत होती है। जल्द ही प्रमोद और सान्वी की शादी की तारीखें तय हो गई और इससे जुड़ी सारी अन्य बातें भी तय हो गई।
सान्वी को अब बिना किसी के पहरे के घूमने की इजाज़त थी। एक दिन एक तय समय पर वह मैगी नूडल्स खरीदने के बहाने अपने घर से बाहर निकली। सान्वी और प्रमोद वहाँ से सीधा एअरपोर्ट गए और दोनों दिल्ली आ गए, जहाँ धनक ने अपने सहयोगी नेटवर्क के माध्यम से उनके रहने के लिए जगह की व्यवस्था की थी। योजना अनुसार, अगले दिन आर्य समाज मंदिर मेन रीति-रिवाज के साथ सान्वी और प्रमोद ने शादी हो गई । झूठी शिकायतों को रोकने के लिए शादी के सबूत और सहेजी गई बातचीत को स्थानीय पुलिस स्टेशन को भेज दिया गया। धनक ने जोड़े के लिए परामर्श सत्र आयोजन किए जहाँ दोनों को एक साथ जीवन बिताने के लिए काउंसलिंग दी गई और जरूरत पड़ने पर उन्हें भावनात्मक और सामाजिक-कानूनी समर्थन का आश्वासन देने का वादा किया।
यह जोड़ा अब खुशी-खुशी हैदराबाद में बस गया है। ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों के बावजूद, वे जल्द ही अपनी पहली शादी की सालगिरह मनाएंगे और भविष्य में और साथ में और भी सालगिरह मनाने की उम्मीद करते हैं। परिवारों को अभी भी अपने निर्णय के साथ सामंजस्य बिठाने में कठिनाई होती है, जबकि बच्चों को अपने माता-पिता को मनाने की कोशिश में इतना समय और ऊर्जा बर्बाद करने का अफसोस होता है। वे उस समय का उपयोग अपने जीवन और करियर के बारे में सोचने के लिए कर सकते थे। प्रमोद और सान्वी दोनों को यह सोचकर आज भी दुख होता है कि जिस समाज ने उन्हें पालने-पोसने या शिक्षित करने के लिए कभी कुछ नहीं किया, वह अचानक उनके माता-पिता के लिए इतना महत्वपूर्ण हो गया। अपने बच्चों की ख़ुशी के प्रति माता-पिता की उदासीनता के भावनात्मक घाव; यातना की यादें, जातिगत पूर्वाग्रह पर आधारित सामाजिक निषेधाज्ञा ने इस युवा जोड़े पर एक गहरा निशान छोड़ा है, खासतौर से सान्वी पर। वो अभी तक भी अपने अनुभव के साथ तालमेल बिठाना सीख रही है। एक-दूसरे के प्रति उनका प्यार, उनका ख़ुशनुमा साथ, और कभी भी किसी चीज़ को अपने बीच नहीं आने देने का उनका दृढ़ संकल्प भविष्य के लिए आशा जगाता है।

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