अनंत कुमार हेम्ब्रम:
हमारे क्षेत्र कोल्हान में वर्तमान समय में युवा पीढ़ी के लिए नशापान का मुद्दा दिनों दिन गंभीर रूप धारण कर रहा है। क्षेत्र की युवा पीढ़ी के भविष्य को देखते हुए, इस समस्या का समाधान करने की आवश्यकता है। आज के समय में तो युवा पीढ़ी को देखकर किशोर अवस्था के बच्चों पर भी इसके गहरे प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। युवा वर्ग के साथ-साथ उनके पीछे की पीढ़ी भी अनुसरण करते हुए सही-गलत का विचार नहीं कर पाते हैं। इस कारण समाज के अन्दर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक आदि चीज़ों को समझ नहीं पा रहे हैं।
हमारे समाज में सांस्कृतिक रूप से प्रयोग लाने वाले सोमरस (हड़िया) का प्रयोग प्रसाद के भाँति किया जाता है। लेकिन अब इस सोमरस का संस्कृति के नाम पर दुरूपयोग किया जाने लगा है। आज के समय में खुली जगहों के हाट, चौराहा, गाँव के सड़क किनारे, मेला आदि जगहों पर इसे बेचा जा रहा है। इस कारण समाज में नशे के रूप में इसका प्रयोग किया जाने लगा है। ज़्यादा मात्रा में प्रयोग के कारण नशापान के तौर पर बाहरी नशीले पदार्थों का प्रचलन जैसे – अंग्रेजी शराब आदि का प्रयोग तेज़ी पकड़ रहा है और इन बाहरी चीज़ों की लोगों को लत लग चुकी है। इस तरह के बाहरी प्रदूषित नशापान के चलते समाज के ग्रामीण क्षेत्रों में अशांति फैल रही है, इसके कारण परिवारों में झगड़े, बलात्कार, अशिक्षा, और समाज के अन्दर दिनों दिन बहुत रफ़्तार से बढ़ रही है।
संगठन बनाना –इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक संगठन का निर्माण करना है, इस संगठन में दृढ विचार के साथ अनुशासन के आधार पर संगठन बनेगा। संगठन के माध्यम से एक-दूसरे में पहचान बनेगी और इस संगठन का विचार हमेशा एक केन्द्रित होकर अपने क्षेत्र के सभी प्रखंड, ज़िले, अनुमंडल, पंचायत, गाँव, वार्ड में इसका विस्तार करते हुए बनाया जाएगा, ताकि संगठन का मूल उद्देश्य पूरा हो सके।
संघर्ष की रणनीति –इस विषय को समाज के सभी लोगों तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र के अनुसार बनाई गयी टीम को इस विषय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके माध्यम से क्षेत्र के सभी गाँवों में ग्राम सभा की बैठक होगी। इस बैठक में सभी महिला, पुरुष, बच्चे उपस्थित होंगे। इस बैठक के पूर्व, सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा बैठक की सूचना डाकुवा (चौकीदार) के माध्यम से अवगत करा कर बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने की अपील की जायेगी। बैठक में नशापान से होने वाली घटनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा ताकि इसकी नकरात्मक चीज़ों को स्पष्ट रूप से जाना जा सके। उदाहरण के लिए नशापान से परिवार में विवाद होते हैं जिसके कारण परिवार के सदस्यों में दूरी पैदा होती है, यह समाज के अन्दर आर्थिक तौर पर पिछड़ने का कारण बनता है, इस आर्थिक पिछड़ेपन से भविष्य के बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ता है। नशापान के चलते महिलाओं, स्त्री पर गलत दृष्टि बनती है, जिससे समाज के अंदर बलात्कार जैसी घटनाएँ सामने आती है।
इन समस्याओं से मुक्त करने के लिए समाज के अंदर बाहरी नशापान (देशी-विदेशी) पर पूर्ण रूप से पाबंदी कर दी जायेगी, हड़िया को हाट, गाँव, चौराहा, मेला आदि जगहों पर बेचने पर पाबंदी लगायी जायेगी और मुंडा के अध्यक्षता के माध्यम से समस्त ग्रामीण लोगों को हड़िया का प्रयोग सिर्फ सांस्कृतिक विधि-विधान में प्रयोग करने को कहा जाएगा और इस नियम के विरुद्ध जाने वाले व्यक्ति को समुदाय के लोगों के समक्ष दंड देने का प्रावधान के लिए नियम लागू कराये जाएंगे।
लोगों को जोड़ना- इस समस्या को समाज के अंदर दूर करने के लिए समाज के बुद्धिजीवी वर्ग, क्षेत्र के प्रतिनिधि, विद्यार्थी वर्ग, ग्रामीण क्षेत्र के महिला समूह, क्षेत्र के अनुसार समबन्धित अधिकारी, पदाधिकारी, इत्यादि को जोड़ा जाएगा ताकि इस जागरूकता अभियान दौरान किसी भी तरह असामाजिक तत्व बाधा न बनें। साथ ही क्षेत्र से बाहर रहने वाले नौकरी-पेशा वर्ग को भी जोड़ा जाएगा। इनके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठन के नेतृत्वकर्ता को भी जोड़ा जाएगा। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय व अन्य शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक-शिक्षिका, प्रधानाध्यापक, आदि को जोड़ा जाएगा। विभिन्न संस्था से कार्य करने वाले लोगों को नशापान व उससे जुड़ी हानि के बारे में ज्ञान व जागरूकता दी जायेगी, और अलग-अलग तरह की चिकित्साओं के बारे में बताया जाएगा।
इस मुद्दे को बड़े मुद्दे से जोड़ना-वर्तमान समय में देखें तो नशापान, अलग-अलग तरीकों से पारिवारिक और आर्थिक शोषण का कारण बनता है। इसकी वजह से पिछड़ेपन की एक स्थिति बनी हुई है। समाज में ज़्यादा मात्र में नशापान प्रयोग करने से कैंसर, और ह्रदय रोग आदि जैसी गंभीर बीमारी हो सकती हैं। आज के समय में हमारे देश के सभी राज्यों में कैंसर का रोग और हृदय की बीमारियाँ एक बड़ी समस्या के रूप में उभरी हैं। इसके लिए विभिन्न क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आवाज़ बुलंद करनी होगी। एक-दूसरे सामंजस्य स्थापित कर पूरे क्षेत्रों में नशापान को मुद्दा बनाकर इसे फैलाना होगा, ताकि वृहद् रूप से इसके खिलाफ एक आवाज़ बने और समाज में चेतना बढ़े और सत्ता पक्ष का भी इस विषय पर पर ध्यानाकर्षित किया जा सके। इसके मुद्दे से जुड़े सही-गलत सभी पक्षों के तकनीकी पहलू पर भी बात होनी चाहिए ताकि इस मुद्दे पर निरंतर चर्चा बनी रहे और जागरूकता की मिसाल कायम हो सके।
फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है। फोटो आभार: नवोदय टाइम्स

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