मंजुलता मिरी:
ग्राम लोहरा कोर्ट, ग्राम पंचायत भुकलुडीही के निवासी मनीराम और 5 अन्य परिवार, जंगल की ज़मीन पर 40-45 वर्षों से काबिज करके खेती-किसानी करते आये हैं व घर बनाकर रह रहे हैं। मनीराम अपने बीवी-बच्चे के साथ अपना जीवन-यापन करते हैं, शोभाराम सेवक रामलाल और सीता देवी, सभी अपने परिवारों के साथ काबिज भूमि पर रहते हैं और खेती-किसानी भी करते हैं, तथा पक्का मकान भी बनाए हैं। मनीराम द्वारा बताया गया कि लोहरा कोर्ट के बस्ती में भी उनकी 3 डिसमिल ज़मीन है, जिसमें उनका बड़ा बेटा और बहू रहते हैं। और शोभाराम की भी बस्ती में 4 डिसमिल ज़मीन है। बाकी 3 परिवारों की ज़मीन सिर्फ जंगल की काबिज की हुयी ज़मीन है।
शोभाराम और सेवकराम आदिवासी समुदाय से हैं और मनीराम मैया लाल व सीता देवी सतनामी समुदाय से हैं। इन 5 परिवारों की महिलाओं ने बताया कि उनके साथ भेदभाव और छुआछूत किया जाता है और बोलते हैं कि तुम दलित-आदिवासी हमारी ज़मीन के आसपास नहीं रह सकते हो। अगर ये कहीं जाते भी थे तो वीरेंद्र पटेल और उनकी बीवी द्वारा बोला जाता था कि नीच लोग आ रहे हैं दूर से चलना, आप लोग नीच जाति के हो, इत्यादि। ऐसे 2 साल तक भेदभाव के बाद, वीरेंद्र पटेल और बाल मोती पटेल लोकनाथ, छोटे महेंद्र राणा मिलकर उन 5 परिवारों के पास गए और बोले कि आप लोग का पता नहीं बनेगा इसलिए आप लोगों का ज़मीन हमें बेच दो, बदले में हम जो आपको पैसा देंगे उससे कहीं जाकर अच्छी सी ज़मीन खरीद कर रहना। तब वीरेंद्र पटेल, सेवकराम को कहा कि आप आदिवासी हो, आप लोगों को कुछ नहीं आता, गँवार हो, अच्छा-खासा पैसा मिलेगा अगर अपनी ज़मीन बेच दोगे।
तब मनीराम और बाकी परिवार वालों ने बोला कि हम अपनी ज़मीन नहीं बेचना चाहते हैं, हम खेती कर रहे हैं। फिर वीरेंद्र पटेल और उनके साथी वहाँ से आ गए। कुछ दिन बाद उन दो आदिवासी परिवारों के साथ मार-पीट की गयी और उनको ट्रैक्टर में बिठाकर टीमली जंगल में छोड़ दिया और वीरेंद्र पटेल, बाल मोती पटेल ने सेवकराम और शोभाराम को कहा कि अगर इस जंगल से घर जाओगे तो तुम्हें जान से मार देंगे, तुम आदिवासी हो, हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
एक दिन सेवकराम अपनी बीवी को लेकर खुद का इलाज करवाने सरकारी अस्पताल जाने लगा तब भी वीरेंद्र पटेल ने धमकी दी कि सरकारी अस्पताल जाओगे तो और मारपीट करेंगे। तब सेवकराम और शोभाराम मार-पीट के चलते डर गए थे और अपना इलाज नहीं करवाए। फिर रात को सेवकराम और शोभाराम अपने परिवार को लेकर घर आ गए। 2 दिन के बाद में महेंद्र राणा, वीरेंद्र पटेल, लोकनाथ खुटे और बाल मोती पटेल, जेसीबी लेकर के बस्ती पहुंचे। साथ में 20-25 लोगों को भी लेकर आए और उन 5 परिवारों का घर तोड़-फोड़ दिए। तब भी वह पाँच परिवार वहाँ से हटे नहीं और उसके दूसरे दिन सभी ने अपनी-अपनी ज़मीन पर झोपड़ी बनाई और उसमें ही रहने लगे।
इन पाँचों परिवारों ने पुलिस में जाकर रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। पर शोभाराम द्वारा बताया गया कि पुलिस ने पटेल परिवारों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की। मनीराम ने बताया कि एसपी उन लोगों का साथ दे रहा है और उनको अंदर करने के बजाय उन्हीं लोगों का साथ दे रहा है। फिर 27 अप्रैल 2023 को महेंद्र राणा, वीरेंद्र पटेल और बाल मोती पटेल ने उन 5 परिवारों की झोपड़ी में आग लगा दी। उनकी झोपड़ी में राशन, बर्तन, कपड़ा, टीवी, कूलर, सोना-चांदी सभी सामान रखे हुए थे, सब सामान जला दिए गए। मनीराम और बाकी परिवार जब थाने में रिपोर्ट लिखवाने गए, तो पुलिस कर्मियों ने उल्टा उन परिवारों पर सवाल कर दिया कि ऐसे कैसे घर जला देगा कोई किसी का। यह कह कर उन सभी को थाने से भगा दिया।
पुलिस व दबंगों के व्यवहार से परेशान होकर, शोभाराम और मनीराम, दलित आदिवासी मंच से संपर्क किए। संगठन के साथियों से उन्होंने सारीघटनाओं की जानकारी साझा की। दलित आदिवासी मंच की राजीम केतवास पहल करते हुए, पाँचों परिवारों को थाना लेकर गई और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाने पर जोर दिया। तब जाकर पुलिस ने कार्यवाही करना चालू किया और उन गुनहगारों में से एक को गिरफ्तार किया गया। बाकी के लोग अब भी फरार हैं। हाल ही में कलेक्टर द्वारा एसडीएम को आदेशित किया गया है कि उन 5 परिवारों की रहने के लिए व्यवस्था की जाए। एसडीएम ने पिथौरा आदिवासी छात्रावास हॉस्टल में उन 5 परिवारों की रहने की व्यवस्था की और भूकलूडीही के सरपंच को राशन देने के लिए निर्देशित किया है।

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