ललित उप्रेती:
इस बार का युवा महोत्सव महाराष्ट्र के वर्धा जिले में था जो 16 से 18 जून 2023 तक 3 दिन चला। इस युवा महोत्सव में करीब 15 राज्यों के ढाई सौ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
युवा महोत्सव से लौटने के बाद पुरानी 1 साल की वह यादें ताज़ा हो गई, जो हमने लगभग पिछले पाँच कार्यशालाओं में एक साथ बिताई। ऐसा लगा कि मानो कल की ही बात हो, और हम सभी साथी राजस्थान के झिरी गाँव में सामाजिक परिवर्तन शाला में मिल रहे हों। वहाँ पर ही हमारी सबकी पहली मुलाकात हुई थी। लगभग 12 राज्यों के 45 साथी थे उस शिविर में। हम भी नये थे, हमें भी पता नहीं था कि अभी क्या होगा, सभी लोगों के अपने-अपने ग्रुप बन गए। एक-दूसरे के नामों से परिचित नहीं थे, कौन कहाँ से हैं, किस राज्य से आये हैं, इत्यादि जानने के लिए एक पूरा सत्र चला। सभी लोगों को एक गोले में बैठकर अपना तथा सभी साथियों के एक-एक कर के नाम बोलने थे। एक-एक नाम हमने लगभग 45 बार सुना, फिर भी सभी नाम याद नहीं हुए, लेकिन धीरे-धीरे शिविर में समय बिताते हुए सभी साथियों के नाम भी याद हो गए।
मुझे पहले समझ में नहीं आया कि इस तरह की कार्यशाला चलेगी। पूरी क्लास को तीन भागों में बांट दिया- पहला भाग ‘शिकारी-संग्रहक’, दूसरा ‘पशुपालक’, व तीसरा ‘खेतिहर समुदाय’। तीनों ग्रुप आपस में बहस करने लगे और ऐसी परिस्थिति बनी जब मानव खेती की तरफ अग्रसर हो रहा था और उसके सामने क्या-क्या समस्याएँ आई होंगी। तीनों ग्रुपों में बहुत बहस हुई, एक दूसरे को किस से क्या परेशानी हुई वह बहस के दौरान उजागर हुई।
अगली कड़ी में हमसे कहा गया कि एक बड़ा सा गोला बनाइए। सब एक साथ चिपक जाइए, और उसके बाद आपनी-अपनी दिशा की तरफ दौड़ लगाइए। सब ने ऐसा ही करा, यह बिग बैंग थ्योरी (big-bang-theory) को बहुत ही सरलता से समझता है – कि कैसे एक बिंदु था, वह फटा उसके बाद किस तरह से उसके अंदर बिखराव हुआ। उसी बिखराव के कारण बहुत सारे तारे बने, आकाशगंगा बनी, हमारा सौरमंडल बना। बिग बैंग लगभग 15 अरब साल पहले हुआ और हमारा सौरमंडल करीब साढ़े चार अरब साल पहले बना। पृथ्वी भी लगभग 4.4 अरब साल पहले अस्तित्व में आई।शुरुआत में पृथ्वी आग का गोला था और आगे चलकर कैसे इस पर लाखों सालों तक बारिश होती रही। उसके बाद पृथ्वी का तापमान कम हुआ और बड़े-बड़े समंदर बने।
पृथ्वी में जीवन की शुरुआत करीब 4 अरब साल पहले हुई। पहले एक-कोशिकीय जीव बने, फिर धीरे-धीरे जटिल समुद्री जीव का निर्माण हुआ। बहुकोशिकीय जीवों का निर्माण हुआ। समुंद्र से बाहर निकल कर जब जीव ज़मीन पर निकले, तो रेंगने वाले जीवों का निर्माण हुआ। छोटे-छोटे पंख वाले कीटों का और धीरे-धीरे पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी का पृथ्वी पर विकास होने लगा। इसी क्रम में लगभग लगभग 4.5 करोड़ साल पहले वनमानुष विकसित हुआ। आगे मानव विकास का क्रम कैसे चला, इसकी चर्चा हुई। दिन भर में शिविर में यह सभी नई बातें जानने और सीखने के बाद, सामाजिक परिवर्तन शाला में रात को सांस्कृतिक प्रोग्राम होते थे, जैसे नाच-गाना, गीत आदि। झिरी में हुए पहले शिविर में तो मैं हिचकिचाहट के कारण सांस्कृतिक प्रोग्राम को दूर से ही देखता था…पर अगले चार शिविरों में इस बिंदु पर भी मेरे अन्दर बहुत बदलाव आए।
उसके बारे में फिर आगे लिखा जाएगा….. ।









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