जागृति सोनकर:

नेपाल रंगो से भरपूर एक सुंदर देश है। ये अलग-अलग विविधताओं से पूर्ण है। इसका अंदाज़ा इसी बात से हम लगा सकते है कि जहाँ एक ओर बर्फ़ से ढकी पहाड़ियाँ है, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जो नेपाल को और आकर्षक बना देता है। 

नेपाल परिवहन – नेपाल में ट्रेन अधिकतर देश के समतल इलाकों में चलती है जबकि पहाड़ियों में मार्शल, बस और दो-पहिया वाहन चलते हैं। वहाँ के ज़्यादातर लोग पहाड़ों पर पैदल ही घूमते हैं। वहाँ के पढ़ने और नौकरी करने वाले किशोर-किशोरियाँ ज़्यादातर लोग दो-पहिया वाहन का उपयोग करते हैं। नेपाल से दूसरे देशों में सामान के आयात-निर्यात करने के लिए ट्रक ही मुख्य साधन हैं, क्यूंकि ट्रक समतल क्षेत्रों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक बहुत ही सुलभ तरीके से चल सकते हैं। नेपाल के क्षेत्रों में ज़्यादतर डाला गाड़ी भी देखने को मिलती है, क्यूंकि पहाड़ों से किसी भी सामान को लाने में डाला गाड़ी सुलभ रहती है। लोगों से बात करने के बाद पता चला की वहाँ के निवासियों के लिए कहीं भी आने-जाने में कोई भी परेशानी नहीं होती। यहाँ तक कि लोगों को पहाड़ी क्षेत्र से हॉस्पिटल जाने में भी कोई कठनाई नहीं होती है। हॉस्पिटल जाने के लिए लोगों को आसानी से साधन मिल जाते हैं। आपातकालीन अवस्था मे एंबुलेंस और अन्य साधनों की भी सुविधा रहती है। वहाँ के किशोर-किशोरियों से बात करने पर पता चला की नेपाल के तानसेन क्षेत्र मे स्कूल थोड़ी दूर पर है। वहीं पर अगर हम कॉलेज की बात करे तो वह तानसेन से लगभग 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे मे वहाँ के लोगों को कॉलेज आने के लिए बस से आना पड़ता है। लेकिन लोगों को कई बार बस से आने-जाने में कठनियां होती है, क्यूंकि बस हमेशा पर्यटकों से भरी रहती है, जिससे उन्हे लंबे वक़्त तक जाने के लिए साधन का इंतज़ार करना पड़ता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़के बहुत ही घुमावदार और कम जगह वाली होती हैं, इससे सिर्फ दो बसें ही एक बार में जा सकती हैं, इस कारण वहाँ के लोगों को नीचे कॉलेज से पैदल आने-जाने में दिक्कत होती है।

नेपाल यात्रा में मेरा अनुभव – हमारी नेपाल की यात्रा 5 मई 2022 को शुरू हुई, जिसके लिए हम फ़ैज़ाबाद बस स्टैंड से गोरखपुर बस स्टैंड तक बस से गए। गोरखपुर बस स्टैंड से नेपाल बॉर्डर तक के लिए भी हमने बस ली। उसके बाद हम सब नेपाल के बॉर्डर के अंदर गए। बॉर्डर के पास पहुँचने पर मैंने देखा कि वहाँ पर ज़्यादा सैनिक नहीं लगे हुए थे। बहुत ही आसानी से लोग एक देश से दूसरे देश की तरफ आ-जा रहे थे। मैंने जबकि हमेशा सोचा था की किसी भी देश के बॉर्डर को पार करने में बहुत सारी कठिनाइयाँ होती होंगी, बहुत चेक किया जाता होगा और ढेर सारी पुलिस और सैनिक लगे होते होंगे। वहाँ पर यह देखने को मिला कि सिर्फ आपका वैक्सीनेशन कार्ड और बैग चेक करने के लिए सिक्योरिटी लगी थी। ये देखा तो मुझे बहुत खुशी हुई कि बिना किसी डर के हम इस देश में आसानी से जा रहे हैं। 

इसके बाद हम सनौली बस स्टैंड पर पहुँचे। वहाँ पर हमने वहाँ के अलग-अलग परिवहन साधनों को देखा, जैसे रिक्शा, मोटरसाइकिल, ट्रक, बस। उन सब में मुझे एक चीज देखने को मिली कि वहां की बस छोटी-छोटी और सजी हुई होती हैं। फिर सनौली से बस के माध्यम से हम बुटवल पहुँचे। इस सफर में हमने नेपाल के समतल इलाकों को तो देखा ही पर दूर से ही हमें पहाड़ भी दिखाई दे रहे थे, जो देखने में काफी आकर्षक हैं। नेपाल के सनौली से लेकर बुटवल तक हल्की गर्मी का मौसम था उसके बाद हम सभी बुटवल से तानसेन बस स्टैंड तक की बस में बैठ गए। इस रास्ते में हमने बड़े-बड़े पहाड़ देखे और घुमावदार सड़कें देखी, जिस पर कई बार एक साथ दो-दो बस चलती दिखी, तो कई बार आगे-पीछे करके। साथ ही सफर में मैंने ये देखा कि पहाड़ों पर सड़कें पक्की और मज़बूत थी। जैसे-जैसे हम तानसेन की पहाड़ियों मे जा रहे थे वैसे-वैसे वहाँ का मौसम बदल रहा था और हल्की ठंडी और नमी का मौसम हो रहा था। तानसेन बस स्टैंड पहुँच कर वहाँ से हम पैदल ही अपने होटल की ओर बढ़े, वहाँ की सड़के ढालदार और खड़ी चढ़ाई वाली थी। दूसरे दिन हम पैदल चल के व्यू पॉइंट टावर (view point tower) तक गए। वहाँ तक पहुँचने में हम सब लोग थोड़ा थक गए जबकि वहाँ के लोग उस पहाड़ी पर आसानी से चढ़ जा रहे थे। व्यू पॉइंट (view point) पर पहुँच के हमने वहाँ से पूरे तानसेन को देखा।


आशीष कुमार:

नेपाल एक बहुत ही खूबसूरत देश है, बहुत ही शांत स्वभाव के लोग यहाँ निवास करते हैं। यहाँ के लोगों की अपनी विशेष लोककला, संस्कृति, गीत-संगीत, नाटक, कला तथा नृत्य हैं। यह सभी बहुत ही मनमोहक हैं। इनकी कला, गीत-संगीत को जानने-सुनने की तरफ मैं बढ़ा और यहाँ के स्थानीय लोगों- महिलाओं तथा पुरुषों से मैंने बात की। इन सभी लोगों से मिलकर और बातचीत करने से मुझे काफी ऊर्जा मिली। हम जिस जगह पर थे, उस जगह को तानसेन कहते हैं। हमने उनके गीतों को सुना, जो कि बहुत ही प्यारा संगीत है और एकदम भारतीय संगीत की धुनों से मिलता-जुलता है। शायद कुछ पल के लिए मैं उनके गीतों को सुनकर खो सा गया। इनकी भाषा-बोली थोड़ी कम समझ में आती थी, परन्तु एक खास बात यह थी की नेपाल के लोग अच्छी हिंदी बोलते और समझते भी हैं।

हमने और हमारे साथी जो हमारी इस यात्रा में शामिल थे, सबने मिलकर नेपाल के गीतों और नृत्य का मज़ा लिया, खूबसूरत वादियों के बीच पगडंडियों से चढ़ते-उतरते पहाड़ों के मनमोहक दृश्य ऐसे हैं, जैसे कभी हम सपनों मे देखा करते हैं। वहाँ जाकर उन्हें देखने, समझने और सुनने का मौका मिला। संगीत और कलाओं के एक अनोखे संगम वाली जगह थी वह। सभी के घरों में अलग-अलग किस्म की कलाकृतियाँ दिखाई दे रही थी। घरों की बनावट में भी उनकी अद्भुत कालाओं का समन्वय था। नाच, गाना, खूबसूरत वादियों का संगीत जो नेपाल की संस्कृति को दर्शाता है। शादी-विवाह, दिन-त्योहार पर यह देखने को मिलता है और नेपाल के सभी लोगों को अपने भीतर समेटे हुए है। एक ऐसा खूबसूरत देश जिसे नेपाल कहते हैं।

Authors

  • आशीष कुमार, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद ज़िले के रहने वाले हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला के साथ जुड़े हैं। आशीष अवध पीपुल्स फोरम से संस्थापक सदस्य हैं। वह खुद भी एक समय ब्रास बैंड पार्टी के साथ जुड़कर गाना गाया करते थे। आशीष अपनी एक संगीत मंडली बनाकर काम कर रहे हैं। मंडली, युवाओं के साथ उनके समता, बंधुत्व और हक अधिकार के मुद्दे पर काम करती है।
    आशीष गीत-संगीत के साथ विशेष लगाव रखते हैं।

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  • जागृति, दिलकुशा फैज़ाबाद की रहने वाली हैं और 5 सालों से समुदाय में शिक्षिका के रूप में काम कर रही हैं। जागृति उन किशोरियों को पढ़ाने का काम करती हैं जो कई कारणों से स्कूल नहीं जा पाती या जिन को स्कूल छोड़ना पड़ता है। वे महिलाओं के कानूनी हक-अधिकारों को लेकर फैज़ाबाद के 10 समुदायों में अवध पीपुल्स फोरम के साथ काम करती हैं। जागृति ने एन.टी.टी किया है और संविधान मित्र मंडली के समूह का संचालन करती है। इनके साथ 500 किशोरियाँ जुड़ी है जो अपनी ज़िंदगी को शिक्षा के माध्यम से बेहतर कर रही है।

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