सुखलाल तरोले: 

सभी जीवित प्राणियों के लिए पानी या जल अति आवश्यक पदार्थ है। मौजूदा समय में जिस तरह से हमें कोरोना महामारी ने ऑक्सीजन की कीमत का एहसास करा दिया है, उसी तरह आने वाला समय ऐसा भी होगा जब हमें पानी की कीमत पता चल जाएगी। आज अधिकतर शहरों में 10 से 20 रूपये लीटर में पानी बेचा जा रहा है, अगर हमने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ इसी तरह जारी रखी और जल सरंक्षण के कोई उपाय नहीं किए तो पानी भी मुंहमांगी कीमत देने पर भी नहीं मिल पाएगा। पानी एक प्राकृतिक संसाधन है जिस पर मनुष्यों के अलावा सभी जीव-जंतुओं का समान अधिकार है। किन्तु अब इस पर भी कुछ लोग स्वामित्व बनाकर उसका व्यवसाय करने लगे हैं। 

अधिकतर शहरों में रोज कचरा उठाने वाली गाड़ियां चलती हुई दिखाई देती हैं। उन्हीं गाड़ियों के बीच-बीच में पानी के कैन लिए हुई गाड़ियां भी चलती हुई नज़र आती हैं, जिससे लोग 1 रूपये लीटर के दाम पर पानी खरीदते हैं। पहले सरकार द्वारा या किसी निजी संस्था द्वारा प्याऊ लगे हुए रहते थे। लोग किसी व्यक्ति की याददाश्त में प्याऊ बनाना पुण्य का काम समझते थे। अब उनकी जगह पर पानी के एटीएम लगे हुए हैं।      

गांव व शहरों में पानी की समस्या 

कुछ समय पहले तक पानी की समस्या ज़्यादातर शहरों में ही देखने को मिलती थी, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की समस्या देखने को मिल रही है। शहरों की तरह गांवों के लोग भी पानी के लिए लोग अपनी-अपनी बाल्टी-डब्बे लिए लाइन में लगे हुए देखने को मिल जाते हैं। नदी-नालों में पानी सूख गया है, जिससे जानवरों को भी पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लोग बैलगाड़ियों पर पानी की टंकी बांध कर दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर है। 

पानी व शौचालय की समस्या: 

रूवी बाई, उम्र करीब 85 वर्ष से पानी और शौचालय की समस्या पर पूछा गया तो उन्होंने बताया “सरकार द्वारा घर-घर शौचालय बना दिए गए हैं, लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए पानी की व्यवस्था नहीं कर पाए। लोगों को पीने का पानी तक सही से नहीं मिल पा रहा है। शौचालय बनवाने के समय सरकार ने कहा कि अगर शौचालय नहीं बनवाओगे तो राशन नहीं मिलेगा। अब जब शौचालय बनवा लिया तब भी इस महीने का राशन हमें नहीं मिला। कोई सरकार हमारी ओर ध्यान नहीं दे रही हैं।”

रूवी बाई का कहना है कि लोग अपनी-अपनी ट्यूबेल लगाकर धरती के अंदर का पूरा पानी निकाल रहे हैं, जिससे दूसरे लोगों के लिए पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। सरकार/ पंचायत द्वारा पानी की समस्या को दूर करने के लिए कौन-कौन से कार्य किए गए? यह सवाल लोगों से पूछा तो एक युवा साथी ने बताया, “पंचायत द्वारा गाँव में पानी की टंकी व घर-घर तक नल भी लगवा दिए गए हैं, लेकिन टंकी बनने के एक महीने तक नलों में पानी आता रहा उसके बाद से आज तक नहीं आ रहा। ट्यूबेल के पानी को टंकी में भरने के बजाय कोई प्रभावशील व्यक्ति उसका निजी उपयोग कर रहा है। लेकिन गाँव के लोग समस्या उत्पन्न होने पर भी आवाज़ नहीं उठा रहे हैं।”

पानी बचाने के लिए लोगों द्वारा किए जाने वाले प्रयास: 

बारिश के पानी को बचाने के लिए गांव के लोग अपने-अपने खेतों पर मेढ़ बंधन कर फलदार वृक्ष लगा रहे हैं। वे पंचायत से मांग कर रहे हैं कि गांवों में तालाब और कुंए बने ताकि अधिक से अधिक पानी बचा रहे किन्तु उनकी बात पर सरपंच-सचिव आपसी मनमुटाव के कारण ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण उनकी पानी की समस्या का निदान सही से नहीं हो पा रहा है।

फीचर्ड फोटो आभार: फ्लिकर

Author

  • सुखलाल, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह वहाँ के स्थानीय मुद्दों और छात्र मुद्दों पर आदिवासी छात्र संगठन के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं।

    View all posts

One response to “वह दिन दूर नहीं जब मुँहमांगी कीमत पर भी नहीं मिलेगा पानी”

  1. Gopal Patel Avatar
    Gopal Patel

    आदरणीय सुखलाल जी आपने जल संरक्षण के मुद्दे को बखूबी उठाया है हमें जल को बचाने के लिए लोगों में जनजागृति लाना बहुत ही अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अगर पानी की समस्या को आज नहीं समझ सकते हैं तो आने वाले समय में काफी दुर्भाग्यपूर्ण हो सकते हैं हमें पहले से ही इस के कारगर उपाय कर लेना चाहिए जिससे कि हम पानी की किल्लत से बच सकते हैं आपके इस लेख के माध्यम से काफी अच्छी बातें सीखने को मिली है मुझे लगता है कि इस विषय को एक जन आंदोलन में परिवर्तन करने की जरूरत है। आपने हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी के ऊपर प्रकाश डाला है जिससे यह साबित होता है कि आने वाले समय में पानी की भी समस्या हो सकती है तो हमें सजग रहना होगा। आओ करें जल संरक्षण बूंद बूंद से पानी की बचत करना ही हमारा मकसद है। ,जल ही जीवन है
    जल है तो कल है। By-Gopal Patel

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading